HIGHLIGHTS
- सुरमयी सुबह: राजधानी वाटिका (ईको पार्क) में ‘संगीत बिहान’ कार्यक्रम का शानदार आयोजन।
- शास्त्रीय जादू: प्रसिद्ध गायिका नंदिता चक्रवर्ती ने अपनी सुमधुर आवाज से श्रोताओं को बांधे रखा।
- जुगलबंदी: तबले पर शशि शंकर और कीबोर्ड पर सुभाष मिश्रा की संगत ने बिखेरा संगीत का जादू।
- सांस्कृतिक पहल: कला-संस्कृति विभाग और बिहार संगीत नाटक अकादमी की अनूठी कोशिश।
पटना | 14 मार्च, 2026
पटना की भागदौड़ भरी सुबह आज सुरों की चादर में लिपटी नजर आई। कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में राजधानी वाटिका (ईको पार्क) में ‘संगीत बिहान’ का आयोजन किया गया। प्रकृति की गोद और पक्षियों की चहचहाहट के बीच जब शास्त्रीय संगीत के सुर घुले, तो वहाँ मौजूद हर शख्स मंत्रमुग्ध हो उठा।
प्रकृति की गोद में शास्त्रीय सुरों का संगम
कार्यक्रम की मुख्य कलाकार प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका नंदिता चक्रवर्ती रहीं। उन्होंने शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत की ऐसी प्रस्तुति दी कि वाटिका में टहलने आए मॉर्निंग वॉकर्स के कदम थम गए। उनकी सुरीली आवाज ने वातावरण में एक अद्भुत शांति भर दी। कलाकारों के बीच का तालमेल देखते ही बनता था—शशि शंकर मिश्रा ने तबले पर सधी हुई थाप दी, तो सुभाष मिश्रा ने कीबोर्ड पर अपनी अंगुलियों का जादू बिखेरा।
सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की नई परंपरा
’संगीत बिहान’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रातःकालीन समय में शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ना है। सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी ने कलाकारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी विरासत को जीवंत बनाए रखने में सहायक होते हैं। उन्होंने इसे कला और प्रकृति की एक सुंदर ‘जुगलबंदी’ करार दिया।
प्रमुख हस्तियों की रही मौजूदगी
इस सुरमयी सुबह के गवाह बिहार संगीत नाटक अकादमी के सचिव महमूद आलम, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कीर्ति आलोक समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी बने। कार्यक्रम का सफल संचालन लाडली राय ने किया। संगीत प्रेमियों के लिए यह अनुभव किसी ‘मेडिटेशन’ से कम नहीं था।
VOB का नजरिया
डिजिटल शोर और हेडफोन की दुनिया में ‘संगीत बिहान’ जैसी पहल ताजी हवा के झोंके की तरह है। सुबह-सुबह पार्क में टहलते हुए शास्त्रीय संगीत सुनना न केवल तनाव कम करता है, बल्कि हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से भी जोड़ता है। पटना के पार्कों में ऐसे आयोजन नियमित होने चाहिए ताकि कला केवल बंद कमरों या ऑडिटोरियम तक सीमित न रहे, बल्कि जन-जन तक पहुँचे। संगीत और प्रकृति का यह मेल ही असली ‘स्मार्ट सिटी’ की पहचान है।


