HIGHLIGHTS
- ऐतिहासिक पहल: राज्य के सभी DCLRs और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विशेष प्रशिक्षण।
- म्यूटेशन में आएगी तेजी: AI तकनीक से म्यूटेशन अपील और BLDR एक्ट के मामलों का होगा त्वरित निष्पादन।
- साइबर सुरक्षा पर जोर: सरकारी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए साइबर एक्सपर्ट्स ने सिखाए ‘स्मार्ट की-वर्ड्स’ के गुर।
- पारदर्शिता का नया दौर: जमीन संबंधी सरकारी कार्यों को अधिक आधुनिक, दक्ष और जनोन्मुख बनाने का संकल्प।
पटना | 14 मार्च, 2026
बिहार में जमीन विवादों के निपटारे और राजस्व कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए नीतीश सरकार ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) का ब्रह्मास्त्र निकाल लिया है। शनिवार को पटना के पुराना सचिवालय स्थित सभा कक्ष में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा एक दिवसीय एआई आधारित कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राज्य के सभी जिलों से आए भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (DCLR) और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को आधुनिक तकनीक से लैस होने का मंत्र दिया गया।
उपमुख्यमंत्री का विजन: तकनीक से खत्म होगी फाइलों की देरी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार राजस्व प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से म्यूटेशन अपील और बीएलडीआर एक्ट से संबंधित लंबित मामलों के निष्पादन में अभूतपूर्व तेजी आएगी। सिन्हा ने कहा, “हमारा लक्ष्य आम जन को समयबद्ध न्याय दिलाना है और तकनीक इसमें सबसे बड़ी मददगार साबित होगी।”
म्यूटेशन और अपील में एआई का ‘जादू’, सचिवों ने दिया निर्देश
कार्यशाला के दौरान विभाग के सचिव श्री गोपाल मीणा और श्री जय सिंह ने अधिकारियों को बताया कि कैसे तकनीक के समुचित उपयोग से कार्यों की गति बढ़ाई जा सकती है। विशेष रूप से म्यूटेशन अपील और बीएलडीआर एक्ट के मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और उचित तिथि निर्धारण (Scheduling) के लिए एआई आधारित सिस्टम का उपयोग सिखाया गया। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया कि वे अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाएं ताकि नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
सुरक्षित डेटा और ‘स्मार्ट की-वर्ड्स’ की मास्टरक्लास
डिजिटल क्रांति के साथ बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए कार्यशाला में साइबर विशेषज्ञों को भी बुलाया गया था। एक्सपर्ट्स ने अधिकारियों और ऑपरेटरों को एआई आधारित सुरक्षित कार्यप्रणाली के सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि कैसे सही ‘की-वर्ड’ के प्रयोग से तेज और सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जिससे कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी। साथ ही सरकारी डेटा को हैकिंग और सेंधमारी से बचाने के लिए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक श्री सुहर्ष भगत, अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज और आईटी मैनेजर श्री आनंद शंकर सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशासनिक व तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।
VOB का नजरिया
बिहार जैसे राज्य में, जहाँ दीवानी मुकदमों और आपराधिक घटनाओं की एक बड़ी वजह जमीन विवाद है, वहां राजस्व विभाग का ‘हाई-टेक’ होना एक बड़ी उम्मीद जगाता है। अक्सर फाइलों के अंबार और मैन्युअल म्यूटेशन में होने वाली देरी भ्रष्टाचार को जन्म देती है। यदि AI आधारित सिस्टम ईमानदारी से लागू हुआ, तो यह न केवल मुकदमों का बोझ कम करेगा, बल्कि भू-माफियाओं के खेल पर भी लगाम लगाएगा। हालांकि, चुनौती इन तकनीकी उपकरणों के जमीनी स्तर पर सही इस्तेमाल और ब्लॉक स्तर पर नेटवर्क की मजबूती की होगी।


