“हेलो! बोर्ड ऑफिस से बोल रहे हैं, आपकी बहन फेल हो गई है…”; आरा में इंटर रिजल्ट से पहले ठगों का ‘खूनी’ जाल, डेटा लीक पर उठे सवाल

आरा | 14 मार्च, 2026 : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अभी आया भी नहीं कि भोजपुर के आरा में जालसाजों का एक ‘समानांतर बोर्ड’ सक्रिय हो गया है। ये ठग परीक्षार्थियों के परिजनों को फेल होने का डर दिखाकर सरेआम अवैध वसूली की कोशिश कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन जालसाजों के पास छात्रों का वो गोपनीय डेटा मौजूद है, जो सिर्फ बोर्ड या मूल्यांकन केंद्रों के पास होना चाहिए।

HIGHLIGHTS

  • ठगी का नया पैटर्न: “पैसे दो और फर्स्ट डिवीजन से पास हो जाओ” का ऑफर दे रहे हैं जालसाज।
  • सटीक डेटा: ठगों के पास छात्र का नाम, माता-पिता का नाम और रोल नंबर तक मौजूद।
  • बड़े शिकार: चरपोखरी के आनंद प्रकाश और लाखा उच्च विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य तक को आया फोन।
  • आशंका: बारकोडिंग और डेटा एंट्री के स्तर पर निजी एजेंसियों से डेटा लीक होने का खतरा।

​बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम आने से पहले जालसाजों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो गया है जो परीक्षार्थियों के परिजनों को फेल होने का डर दिखाकर अवैध वसूली का तरीका अपना रहे हैं। हाल ही में चरपोखरी के आनंद प्रकाश को जब कॉल आया, तो वह दंग रह गए। फोन करने वाले ने खुद को पटना बोर्ड ऑफिस का कर्मी बताया और अत्यंत आत्मविश्वास के साथ उनकी बहन (नाम गोपनीय) के माता-पिता का नाम और विषय साझा किए। जालसाज ने दावा किया कि छात्रा फिजिक्स और केमिस्ट्री में फेल हो रही है और यदि उसे फर्स्ट डिवीजन चाहिए, तो तुरंत ऑनलाइन भुगतान करना होगा।

​ठगी का यह जाल इतना विस्तृत है कि जालसाजों ने लाखा उच्च विद्यालय बरनी के प्रभारी प्राचार्य बाल गंगाधर तिलक को भी अपना निशाना बनाने की कोशिश की और उनके भतीजे का सटीक विवरण देते हुए बोर्ड ऑफिस के नाम पर फोन किया गया। वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाओं की बारकोडिंग और कंप्यूटर पर डेटा फीड करने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को दी जाती है, जहाँ से डेटा लीक होने की प्रबल आशंका है। इस गंभीर मामले पर भोजपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) मानवेंद्र कुमार राय ने इसे अनुसंधान का विषय बताते हुए अभिभावकों को केवल सतर्क रहने की सलाह दी है।

VOB का नजरिया

​जब शिक्षा विभाग और बोर्ड बार-बार यह कहता है कि कॉपियां और रिजल्ट पूरी तरह गोपनीय हैं, तो फिर ये जानकारी अपराधियों के पास कैसे पहुँच रही है? यह केवल ‘साइबर क्राइम’ नहीं, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद ‘विभीषणों’ की मिलीभगत का मामला लग रहा है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि बिहार बोर्ड कभी भी किसी छात्र को फोन कर पैसे की मांग नहीं करता। रिजल्ट की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और केंद्रीकृत है। ऐसे फोन कॉल आने पर घबराने के बजाय, तुरंत उस नंबर को पुलिस के साइबर सेल को रिपोर्ट करें।

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