भागलपुर — बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक विक्रमशिला एक बार फिर गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंज उठा। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय विक्रमशिला महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के पहले दिन रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रसिद्ध कलाकारों के कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध भजन गायक सुनील कुमार मिश्रा की मंगलाचरण प्रस्तुति से हुई। उन्होंने गणेश वंदना और भगवती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद ‘छाप तिलक सब छोड़ दी रे’, ‘डमाडम मस्त कलंदर’ और ‘सजनी छुड़ाए मोसे बैंया’ जैसे पारंपरिक और सूफी गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान उनके पुत्र अभिज्ञान गर्ग ने भी अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
महोत्सव का उद्घाटन पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, डीडीसी प्रदीप कुमार सिंह, एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और सिटी एसपी शैलेन्द्र सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन समारोह में शहर के गणमान्य लोग, सांस्कृतिक प्रेमी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि विक्रमशिला को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहां देश-विदेश से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आएंगे, जिससे क्षेत्र के पर्यटन और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
महोत्सव के पहले दिन का सबसे आकर्षक क्षण तब आया जब बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका मंच पर पहुंचीं। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। ‘छन-छन चूड़ियां खनकती हाथ मा’ और ‘नैनों ने थारी कैसा जादू किया’ जैसे गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। उनकी मधुर आवाज और दमदार प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
महोत्सव के पहले दिन भक्ति, संस्कृति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक विक्रमशिला परिसर में आयोजित इस आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दराज से आए पर्यटकों को भी आकर्षित किया।
त्रिदिवसीय विक्रमशिला महोत्सव के आगामी दिनों में भी कई प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुति, लोक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक कलाओं की झलक देखने को मिलेगी। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन न केवल क्षेत्र की समृद्ध विरासत को जीवंत रखते हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देते हैं।


