नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मूज एक बार फिर दुनिया की सुर्खियों में आ गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। ईरान, अमेरिका और पश्चिम एशिया के देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री रास्ते की अहमियत और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्ट्रेट ऑफ होर्मूज नाम कैसे पड़ा और इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की ‘लाइफलाइन’ क्यों कहा जाता है।
क्या होता है स्ट्रेट?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “स्ट्रेट” का अर्थ होता है जलडमरूमध्य। यानी समुद्र या महासागर का वह संकरा हिस्सा, जो दो बड़े जलक्षेत्रों को आपस में जोड़ता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
नाम की शुरुआत एक प्राचीन शहर से
इतिहासकारों के अनुसार “होर्मूज” नाम की शुरुआत एक पुराने शहर और समुद्री साम्राज्य से हुई थी। प्राचीन काल में ईरान के तट के पास होर्मूज नाम का एक व्यापारिक शहर बसता था। समय के साथ समुद्री व्यापार बढ़ा और शासकों ने अपना मुख्य केंद्र फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक द्वीप पर स्थानांतरित कर दिया, जिसे होर्मूज द्वीप कहा जाने लगा।
धीरे-धीरे इस द्वीप और आसपास के समुद्री क्षेत्र को भी उसी नाम से पहचाना जाने लगा और बाद में इस जलडमरूमध्य का नाम स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पड़ गया।
धार्मिक और भाषाई संबंध भी बताए जाते हैं
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि “होर्मूज” शब्द की जड़ें फारसी और अवेस्ता परंपरा से भी जुड़ी हो सकती हैं। फारसी परंपरा में ईश्वर के लिए “अहुरा मज़्दा” नाम का इस्तेमाल होता था। समय के साथ इस नाम के उच्चारण में बदलाव हुआ और “ओरमज़्द” या “ओहरमज़्द” जैसे रूप सामने आए। आगे चलकर यही शब्द स्थानीय बोलियों में बदलते-बदलते “होरमूज़” और फिर “होर्मूज़” बन गया।
हालांकि सभी इतिहासकार इस सिद्धांत से सहमत नहीं हैं, लेकिन इसे एक मजबूत भाषाई कड़ी माना जाता है।
यूरोपीय यात्रियों ने भी बदला उच्चारण
इतिहास में इस नाम को अलग-अलग रूपों में लिखा गया। अरबी और फारसी लेखों में इसे “हुरमूज़” या “होरमूज़” कहा गया, जबकि यूरोपीय यात्रियों और व्यापारियों ने इसे अपनी भाषा के अनुसार Ormuz, Ormus या Hormuz लिखा।
समय के साथ अंग्रेजी में “Strait of Hormuz” नाम प्रचलित हो गया और आज अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों और दस्तावेजों में यही नाम इस्तेमाल किया जाता है।
क्यों कहा जाता है दुनिया की ‘लाइफलाइन’?
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है। इसके कई बड़े कारण हैं:
• दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर अपना तेल इसी रास्ते से निर्यात करते हैं।
• रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इस समुद्री मार्ग से गुजरता है।
• कतर से निर्यात होने वाली बड़ी मात्रा में LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भी इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचती है।
• यह जलडमरूमध्य बेहद संकरा है, जिसकी कुल चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है, जबकि जहाजों के आने-जाने की सुरक्षित लेन केवल करीब 3 किलोमीटर चौड़ी है।
इसी वजह से अगर किसी कारण से यह मार्ग बंद हो जाए, तो पूरी दुनिया में तेल-गैस की भारी किल्लत हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
वैश्विक राजनीति का अहम केंद्र
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज सिर्फ एक भौगोलिक रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का अहम केंद्र भी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान कई बार इस समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी दी जा चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मार्ग कुछ दिनों के लिए भी बाधित हो जाए, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम रास्ता
सरल शब्दों में कहा जाए तो स्ट्रेट ऑफ होर्मूज वह समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के कई देशों के घरों में बिजली, उद्योगों में ऊर्जा और सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए ईंधन पहुंचता है। यही वजह है कि इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की “लाइफलाइन” कहा जाता है।


