सिलेंडर की लाइन बनी ‘मौत की कतार’! गैस किल्लत के खौफ ने ली दो बुजुर्गों की जान; 3 घंटे कतार में खड़े रहने के बाद मुख्तार अंसारी ने तोड़ा दम

HIGHLIGHTS:

  • बड़ी त्रासदी: उत्तर प्रदेश और पंजाब में गैस सिलेंडर के लिए लगी लाइन में दो बुजुर्गों की मौत।
  • फर्रुखाबाद का मामला: 75 वर्षीय मुख्तार अंसारी की सुबह 6 बजे से लाइन में खड़े रहने के बाद हार्ट अटैक से मौत।
  • पैनिक बुकिंग: खाड़ी देशों के संकट की खबरों के बीच गैस की किल्लत के डर से उमड़ रही है भारी भीड़।
  • सिस्टम पर सवाल: घंटों इंतजार और धक्का-मुक्की ने बुजुर्गों के लिए पैदा की जानलेवा स्थिति।

सिलेंडर मिला नहीं, सांसें थमीं: गैस के लिए ‘मशक्कत’ बनी ‘मौत’ की वजह

फर्रुखाबाद/चंडीगढ़: पूरे देश में इन दिनों रसोई गैस को लेकर मची अफरा-तफरी अब जानलेवा साबित होने लगी है। खाड़ी देशों में युद्ध के तनाव के कारण गैस सप्लाई रुकने की अफवाहों और पैनिक बुकिंग के बीच उत्तर प्रदेश और पंजाब से दो बेहद दुखद खबरें सामने आई हैं। गैस सिलेंडर पाने की जद्दोजहद में दो बुजुर्गों को अपनी जान गंवानी पड़ी। घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद ‘हृदयाघात’ (Heart Attack) ने उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी।

सुबह 6 बजे से ‘खाली सिलेंडर’ लेकर खड़े थे बुजुर्ग

​मृतक के बेटे शाहनवाज ने बताया कि उनके पिता इस डर से सुबह 6 बजे ही एजेंसी पहुंच गए थे कि कहीं गैस खत्म न हो जाए।

  • खौफनाक मंजर: 3 घंटे तक बुजुर्ग मुख्तार अंसारी भारी भीड़ के बीच अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
  • अचानक गिरे: सुबह करीब 9 बजे वह अचानक जमीन पर गिर पड़े। आसपास के लोग उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ‘मृत’ घोषित कर दिया।
  • पंजाब में भी मौत: इसी तरह की एक और घटना पंजाब में भी सामने आई है, जहाँ सिलेंडर की लाइन में लगे एक और बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।

क्यों मची है गैस के लिए ‘हाहाकार’?

​गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय हालात (ईरान-इजरायल युद्ध) के कारण घरेलू गैस की किल्लत की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। हालांकि सरकार और जिला प्रशासन (जैसे कल भागलपुर डीएम ने बैठक की थी) बार-बार कह रहे हैं कि स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन लोग ‘डर’ के मारे एक्स्ट्रा सिलेंडर भरने के लिए एजेंसियों पर टूट पड़ रहे हैं। यही ‘पैनिक’ आज दो परिवारों के लिए मातम में बदल गया।

VOB का नजरिया: क्या ‘अफवाहों’ और ‘पैनिक’ की जिम्मेदारी प्रशासन लेगा?

यह मौतें केवल स्वास्थ्य कारणों से नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और समाज में फैले डर का परिणाम हैं। अगर गैस की आपूर्ति सामान्य है, तो एजेंसियों पर इतनी लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं? क्यों 75 साल के बुजुर्गों को सुबह 6 बजे से लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है? प्रशासन को होम डिलीवरी व्यवस्था सख्त करनी चाहिए ताकि बुजुर्गों को सड़कों पर जान न गंवानी पड़े।

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