HIGHLIGHTS:
- मेगा रोडशो: ‘इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स मीट 2026’ में बिहार सरकार ने बेंगलुरु के दिग्गजों को दिया निवेश का न्यौता।
- पॉलिसी का पावर: सेमीकंडक्टर नीति 2026 और GCC पॉलिसी से टेक वर्ल्ड में धमाका करने को तैयार बिहार।
- बड़ी गवाही: ‘सुपरसेवा’ का 70% काम बिहार से संचालित; अमेरिकी प्रोजेक्ट्स के लिए मुफीद साबित हो रहा राज्य।
- स्मार्ट विजन: बेंगलुरु की ‘इलेक्ट्रॉनिक सिटी’ (ELCITA) की तर्ज पर बिहार में बनेंगे आधुनिक इंडस्ट्रियल टाउनशिप।
बेंगलुरु में ‘ब्रांड बिहार’ का जलवा: निवेश का नया ग्लोबल एड्रेस
बेंगलुरु: बिहार अब केवल ‘मजदूरों का राज्य’ नहीं, बल्कि ‘इंजीनियर्स और टेक-सर्विस’ का नया केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। बेंगलुरु में आयोजित ‘इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स मीट 2026’ में बिहार के हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग जगत के दिग्गजों को चौंका दिया। उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने साफ कर दिया कि बिहार अब ‘इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन’ के नए चरण में है, जहाँ सेमीकंडक्टर से लेकर आईटी सेवाओं तक के लिए लाल कालीन बिछाया गया है।
[बिहार की ‘इन्वेस्टमेंट डायरी’: नई नीतियों का जाल]
बैठक में सरकार ने अपनी उन ब्रह्मास्त्र नीतियों का प्रदर्शन किया, जो निवेशकों को बिहार खींचने के लिए काफी हैं:
सुपरसेवा का ‘बिहार मॉडल’: 70% कार्यबल बिहार से!
रोडशो में ‘सुपरसेवा’ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कुमुद शर्मा ने एक ऐसा अनुभव साझा किया जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी को एक अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी से बड़ा ऑर्डर मिला है, जिसका 70 प्रतिशत कार्यबल बिहार से संचालित हो रहा है। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि बिहार का स्किल्ड मैनपावर अब ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर खरा उतर रहा है।
[फील्ड विजिट: इन्फोसिस और ईएलसीआईटीए का दौरा]
सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि एक्शन भी! बिहार के प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु की बारीकियों को समझा:
- ELCITA (Electronic City): स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप, सुरक्षा और कचरा प्रबंधन के मॉडलों का अध्ययन किया गया।
- MoU की तैयारी: भविष्य में ELCITA को बिहार का ‘नॉलेज पार्टनर’ बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर विचार हो रहा है।
- विजिट: टीम ने इन्फोसिस कैंपस और वेलांकनी ग्रुप की विनिर्माण इकाइयों का भी दौरा किया ताकि बिहार में इसी तरह का इकोसिस्टम बनाया जा सके।
आईटी सचिव का दावा— “डिजिटल नवाचार का केंद्र बनेगा बिहार”
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने आईटी पॉलिसी की बारीकियों को समझाया। उन्होंने बताया कि बिहार अब केवल बीपीओ (BPO) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और डिजिटल इनोवेशन के जरिए दुनिया की बड़ी कंपनियों का बैक-ऑफिस बनेगा।
VOB का नजरिया: क्या बिहार बन पाएगा नया ‘बेंगलुरु’?
बिहार सरकार का बेंगलुरु जाकर निवेशकों से सीधी बात करना और वहां की ‘इलेक्ट्रॉनिक सिटी’ के मॉडल को समझना एक विजनरी कदम है। कुंदन कुमार और अभय कुमार सिंह की जोड़ी जिस ‘नॉलेज पार्टनरशिप’ की बात कर रही है, वह बिहार के औद्योगिक टाउनशिप के लिए गेम-चेंजर हो सकती है। चुनौती केवल पॉलिसी बनाने की नहीं, बल्कि बिहार की जमीन पर बेंगलुरु जैसी ‘स्मार्ट सुविधाएं’ और ‘सुरक्षा’ प्रदान करने की है। अगर ‘सुपरसेवा’ जैसी कंपनियां 70% काम बिहार से कर सकती हैं, तो इन्फोसिस जैसी दिग्गज कंपनियां भी बिहार से दूर नहीं हैं।


