बेतिया में निगरानी विभाग का ‘बड़ा धमाका’! 30 हजार घूस लेते गव्य विकास अधिकारी गिरफ्तार; अनुदान के नाम पर किसान को बना रहा था ‘एटीएम’

HIGHLIGHTS:

  • रंगे हाथ गिरफ्तारी: पटना निगरानी विभाग की टीम ने जिला गव्य विकास कार्यालय के फील्ड ऑफिसर अनुराग अभिषेक को दबोचा।
  • रिश्वत का सौदा: 1.90 लाख रुपये के सरकारी अनुदान को पास करने के बदले मांग रहा था 30 हजार की घूस।
  • किसान की हिम्मत: गौनाहा के पशुपालक बबलू कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई आवाज, बिछाया जाल।
  • पुराना खेल: आरोपी अधिकारी पहले भी इंश्योरेंस के नाम पर किसान से डकार चुका था 32 हजार रुपये।

सरकारी दफ्तर में ‘भ्रष्टाचार का खेल’ खत्म: निगरानी विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक

बेतिया: पश्चिम चंपारण के बेतिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ पटना निगरानी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिला गव्य विकास कार्यालय में तैनात फील्ड अधिकारी अनुराग अभिषेक को 30,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब अधिकारी साहब एक गरीब पशुपालक किसान के सरकारी अनुदान की फाइल को ‘पैसे’ के दम पर आगे बढ़ाने की डील कर रहे थे।

[केस फाइल: लालच की कोई सीमा नहीं]

​पशुपालक किसान बबलू कुमार ने अपनी मेहनत की कमाई और सरकारी हक को बचाने के लिए निगरानी विभाग का दरवाजा खटखटाया था।

विवरण

जानकारी

आरोपी अधिकारी

अनुराग अभिषेक (फील्ड ऑफिसर, जिला गव्य विकास कार्यालय)

कुल अनुदान राशि

₹1,90,000 (एक लाख नब्बे हजार)

रिश्वत की मांग

₹30,000 (ताजा मामला)

पूर्व में ली गई राशि

₹32,000 (इंश्योरेंस के नाम पर)

गिरफ्तारी की जगह

जिला गव्य विकास कार्यालय, बेतिया

DSP का बयान: “इंसोरेंस के नाम पर पहले भी की थी ठगी”

​निगरानी डीएसपी मिथिलेष कुमार ने बताया कि आरोपी अधिकारी अनुराग अभिषेक ने गौनाहा के किसान बबलू कुमार को अनुदान दिलाने के बदले परेशान कर रखा था।

  • पहला वार: आरोपी ने पहले ही किसान से बत्तीस हजार रुपये इंश्योरेंस कराने के नाम पर ऐंठ लिए थे।
  • दूसरा दांव: जब अनुदान की दूसरी प्रक्रिया शुरू हुई, तो उसने फिर से 30 हजार रुपये की मांग रख दी।
  • ट्रैप: किसान ने इसकी सूचना पटना निगरानी विभाग को दी। टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही अधिकारी ने कार्यालय में घूस की रकम हाथ में थामी, पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।

कार्यालय में मचा हड़कंप, आरोपी को पटना ले गई टीम

​जैसे ही निगरानी विभाग की टीम ने फील्ड ऑफिसर को गिरफ्तार किया, पूरे जिला गव्य विकास कार्यालय में अफरा-फरी मच गई। अधिकारी साहब की दबंगई धरी की धरी रह गई। गिरफ्तारी के बाद जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी कर टीम आरोपी को पटना ले गई है, जहां विशेष अदालत में पेशी होगी।

VOB का नजरिया: कब सुधरेंगे भ्रष्ट अधिकारी?

बिहार सरकार ‘पशुपालन और गव्य विकास’ के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, लेकिन अनुराग अभिषेक जैसे अधिकारी उन्हीं किसानों का खून चूसने में लगे हैं। 1.90 लाख के अनुदान में से अगर 62 हजार (32+30) रुपये अधिकारी ही खा जाएगा, तो किसान पशुपालन कैसे करेगा? बेतिया की यह कार्रवाई उन सभी भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी कुर्सी को वसूली का अड्डा समझते हैं।

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