जन सुराज के इफ्तार में ‘सियासी तड़का’! पटना में भाईचारे का पैगाम; बोले ओबैदुर रहमान- “गैस की किल्लत रही तो कैसे बनेगी ईद की सेवइयां?”

HIGHLIGHTS:

  • सामाजिक सद्भाव: जन सुराज पार्टी के पटना कार्यालय में दावत-ए-इफ्तार का भव्य आयोजन।
  • बड़ा संदेश: प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती बोले— “इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म।”
  • पॉलिटिकल अटैक: गैस किल्लत को लेकर केंद्र सरकार पर बरसे ओबैदुर रहमान; कुप्रबंधन का लगाया आरोप।
  • त्योहार पर संकट: ईद के मौके पर रसोई गैस की कमी को लेकर जताई गहरी चिंता।

पटना में ‘सद्भाव की थाली’ और केंद्र पर ‘सवालों की बारी’

पटना: चुनावी बिसात के बीच सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को पटना स्थित जन सुराज पार्टी के प्रदेश कार्यालय में ‘दावत-ए-इफ्तार’ का आयोजन किया गया। पाक रमजान के इस मौके पर न केवल रोजेदारों ने एक साथ इफ्तार किया, बल्कि मंच से भाईचारे और सौहार्द की अपील भी की गई। लेकिन इस धार्मिक आयोजन में ‘गैस संकट’ का मुद्दा भी खूब गरमाया, जिसे जन सुराज ने सीधे केंद्र सरकार की विफलता से जोड़ दिया।

“गैस नहीं तो सेवइयां कैसे बनेंगी?”: केंद्र सरकार को घेरा

​पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी ओबैदुर रहमान ने इफ्तार के बाद मीडिया से बात करते हुए देश और राज्य में चल रही रसोई गैस की किल्लत पर तीखा प्रहार किया।

​”यह केंद्र सरकार का घोर कुप्रबंधन है। जब सरकार को पता था कि मांग बढ़ेगी, तो बैकअप प्लान क्यों नहीं था? ईद का पाक त्योहार सिर पर है और घरों में सिलेंडर नहीं हैं। अगर यही हाल रहा तो बिहार के कई घरों में इस बार ईद की सेवइयां भी नहीं बन पाएंगी।” — ओबैदुर रहमान

 

त्याग और इंसानियत का संदेश: मनोज भारती

​जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने मुस्लिम समाज को रमजान और ईद की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि जन सुराज का मूल मंत्र ही समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना हमें त्याग और संयम सिखाता है, जो आज के समय में समाज को जोड़ने के लिए सबसे जरूरी है।

VOB का नजरिया: इफ्तार के बहाने ‘जमीनी मुद्दों’ की ब्रांडिंग?

जन सुराज ने अपने इफ्तार कार्यक्रम को केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे गैस संकट जैसे ज्वलंत मुद्दे से जोड़कर एक स्मार्ट ‘पॉलिटिकल मूव’ खेला है। त्योहार के समय गैस की किल्लत सीधे गृहणियों और आम आदमी को प्रभावित करती है। इफ्तार के जरिए अल्पसंख्यकों के बीच अपनी पैठ बनाने के साथ-साथ महंगाई और किल्लत पर केंद्र को घेरना, प्रशांत किशोर की पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगती है।

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