
देवघर, 13 मार्च। झारखंड के देवघर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला भू-अर्जन कार्यालय के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। एसीबी की टीम ने प्रधान लिपिक और एक अनुसेवक को 20 हजार रुपये घूस लेते हुए पकड़ा। यह कार्रवाई देवघर रिंग रोड परियोजना से जुड़े मुआवजे के मामले में की गई।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई दुमका एसीबी की टीम ने डीएसपी मोनू टुडू के नेतृत्व में की। समाहरणालय परिसर स्थित जिला भू-अर्जन कार्यालय में अचानक हुई इस छापेमारी से कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मुआवजे की राशि दिलाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
मामला कुंडा थाना क्षेत्र के गौरीपुर गांव के निवासी ब्रह्मदेव यादव से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि उनकी जमीन देवघर रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे की राशि जारी कराने के नाम पर जिला भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नुनुदेव यादव ने उनसे 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
रिश्वत की मांग से परेशान होकर ब्रह्मदेव यादव ने इसकी लिखित शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और आरोप सही पाए जाने पर जाल बिछाकर कार्रवाई की योजना बनाई।
एसीबी ने बिछाया जाल, रिश्वत लेते ही दबोचा
शुक्रवार को एसीबी की टीम ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की राशि आरोपित कर्मचारियों को दी, मौके पर पहले से मौजूद एसीबी अधिकारियों और कर्मियों की टीम ने दोनों को रंगेहाथ पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से रिश्वत के रूप में दिए गए 20 हजार रुपये भी बरामद किए गए। इसके बाद टीम ने कार्यालय में जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की।
पूछताछ के लिए दुमका ले जाया गया
कार्रवाई पूरी होने के बाद एसीबी की टीम दोनों आरोपित कर्मचारियों को अपने साथ दुमका ले गई, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
कार्यालय में मचा हड़कंप
समाहरणालय परिसर के अंदर हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने एसीबी की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि जमीन अधिग्रहण मुआवजे के मामलों में अक्सर किसानों को परेशान किया जाता है और उनसे अवैध वसूली की जाती है।
लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी अब संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।


