मगध विश्वविद्यालय में ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए समावेशी और सतत विकास’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

गया, 13 मार्च। मगध विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुग्रह मेमोरियल कॉलेज, गया में ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए समावेशी और सतत विकास’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अनुग्रह मेमोरियल कॉलेज और इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी (आईकेएस ग्रुप) के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित हुआ।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से आए करीब 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागी सात अलग-अलग तकनीकी सत्रों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे और समावेशी तथा सतत विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

संगोष्ठी के उद्देश्य पर डॉ. राकेश राय का वक्तव्य

कार्यक्रम के संयोजक एवं समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश राय ने उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को समावेशी और टिकाऊ विकास के दृष्टिकोण से समझना है।

उन्होंने कहा कि देश के 18 राज्यों से आए प्रतिभागियों के शोध पत्र सात तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर व्यापक चर्चा संभव हो सकेगी। साथ ही उन्होंने सभी आमंत्रित वक्ताओं, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

प्रो. संजय पासवान ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर दिया जोर

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. संजय पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने आत्मनिर्भर भारत की पहल के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति ने पहले भी दुनिया को दिशा दी है और आने वाले समय में भी भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक सोच विकसित करना आवश्यक है। बेहतर विश्व के निर्माण में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रो. योगेंद्र सिंह ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा पर दिया बल

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा है और इस दिशा में आत्मनिर्भरता की अवधारणा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमेशा से समावेशी और सतत विकास की सोच पर आधारित रही है और यही विचार आज के वैश्विक विकास मॉडल के लिए भी प्रेरणादायक है।

‘सबका साथ, सबका विकास’ आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला

मगध विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया नारा ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास’ आत्मनिर्भर भारत की मूल भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर देश को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है।

अकादमिक जगत की भूमिका पर जोर

अनुग्रह मेमोरियल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मोहम्मद नजीर अख्तर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा और शोध संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास की अवधारणा को मजबूत बनाने में अकादमिक जगत लगातार योगदान दे रहा है।

शोध पत्रिका और पुस्तक का हुआ विमोचन

कार्यक्रम के दौरान मगध विश्वविद्यालय की पीयर रिव्यूड शोध पत्रिका “प्रतिभा सृजन” का विमोचन प्रो. डॉ. पार्थ सारथी के निर्देशन और डॉ. अमृतेंदु घोषाल के संपादन में किया गया। इसके साथ ही हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ. उमाशंकर सिंह द्वारा संपादित डॉ. कृष्णदेव मिश्र की कहानियों के संग्रह “दरारों के बीच झांकता सच” पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम का संचालन दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. श्वेता सिंह और अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमृतेंदु घोषाल ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उमाशंकर सिंह ने किया।

इस अवसर पर प्रो. संजय पासवान, प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. विनोद कुमार मंगलम, प्रो. मोहम्मद नजीर अख्तर, डॉ. राकेश राय के अलावा डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी, डॉ. सत्येंद्र प्रजापति, डॉ. अली हसन, डॉ. कामता प्रसाद, डॉ. सनत कुमार शर्मा, डॉ. गोपाल सिंह, प्रो. परमांशी जयदेवा, डॉ. शंकर लाल समेत कई विश्वविद्यालयों से आए शोधकर्ता, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे।

  • Related Posts

    भागलपुर में दर्दनाक हादसा: तेज रफ्तार बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से महिला की मौत, आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम किया

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    राज्यस्तरीय रग्बी प्रतियोगिता के लिए भागलपुर की टीम नवादा रवाना, खिलाड़ियों में उत्सा

    Share Add as a preferred…

    Continue reading