16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव में पांचवीं सीट पर NDA और RJD के बीच कड़ा मुकाबला, मोकामा विधायक अनंत सिंह के वोट डालने पर अदालत का अहम फैसला
पटना: बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। चार सीटों पर जहां एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, वहीं पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एडी सिंह को मैदान में उतारा है, जिसके बाद सियासी समीकरण और भी जटिल हो गए हैं।
इसी बीच मोकामा से विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह को लेकर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। फिलहाल जेल में बंद अनंत सिंह को राज्यसभा चुनाव में मतदान करने की अनुमति मिल गई है। अदालत के आदेश के अनुसार वे कस्टडी में विधानसभा पहुंचकर मतदान करेंगे और उसके बाद वापस जेल लौट जाएंगे। इस फैसले को एनडीए के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
कोर्ट के फैसले से एनडीए को राहत
जानकारी के अनुसार, मोकामा के विधायक अनंत सिंह इस समय एक आपराधिक मामले में जेल में बंद हैं। उन पर दुलारचंद यादव हत्याकांड में आरोप लगे हैं, जिसके कारण वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके वोट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
अब एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अनंत सिंह चुनाव के दिन सुरक्षा व्यवस्था के बीच विधानसभा लाए जाएंगे, जहां वे अपना मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। राजनीतिक रूप से यह फैसला एनडीए के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पांचवीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला
बिहार विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। वर्तमान संख्या बल के अनुसार एनडीए के पास लगभग 202 विधायक हैं, जिससे चार सीटों पर उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि चार सीटों के बाद बचने वाले विधायकों की संख्या लगभग 38 रह जाती है। ऐसे में पांचवीं सीट के लिए आवश्यक बहुमत जुटाना एनडीए के लिए चुनौती बन गया है।
दूसरी ओर राजद ने इस सीट पर एडी सिंह को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। विपक्ष इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
राजद की रणनीति और विपक्ष का गणित
राजद की रणनीति के अनुसार उसके पास अपने 25 विधायक हैं। इसके अलावा कांग्रेस के 6 विधायक, वाम दलों के 3 विधायक और अन्य सहयोगी दलों के 1 विधायक का समर्थन मिलाकर यह संख्या करीब 35 तक पहुंचती है।
वहीं एआईएमआईएम के पांच विधायक भी निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं। हाल ही में एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी, जिसके बाद यह संकेत मिले हैं कि उनकी पार्टी भी राजद उम्मीदवार को समर्थन दे सकती है। यदि ऐसा होता है तो राजद का आंकड़ा 41 के करीब पहुंच सकता है।
इसके अलावा बसपा के एक विधायक का समर्थन भी विपक्ष के पक्ष में जाने की संभावना जताई जा रही है।
एनडीए भी जुटा रहा समर्थन
उधर एनडीए ने भी पांचवीं सीट जीतने के लिए पूरी रणनीति बना ली है। इसको लेकर हाल ही में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर एनडीए नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सभी विधायकों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
एनडीए ने राज्यसभा चुनाव के लिए जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, उनमें
- जदयू से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर,
- भाजपा से नितिन नवीन और शिवेश राम,
- और रालोमो से उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांचवीं सीट का नतीजा पूरी तरह विधायकों के गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर करेगा। ऐसे में 16 मार्च का मतदान बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।


