रिश्तों का ‘खून’! 6 साल की बहन से 9वीं के भाई ने की दरिंदगी; पेट दर्द ने खोला खौफनाक राज, दहला देगा राजकोट का ये मामला

HIGHLIGHTS:

  • रिश्तों पर दाग: 14 साल के चचेरे भाई ने 6 साल की मासूम बहन को बनाया हवस का शिकार।
  • खौफनाक साजिश: खेलने के बहाने घर की छत पर ले जाकर की दरिंदगी।
  • ऐसे खुला राज: 15 दिन बाद पेट में असहनीय दर्द होने पर अस्पताल पहुंची बच्ची, डॉक्टरों के खुलासे से उड़े होश।
  • पुलिस एक्शन: जेतपुर तालुका पुलिस ने आरोपी किशोर के खिलाफ ‘पोक्सो (POCSO)’ एक्ट के तहत दर्ज किया मामला।

छत पर खेल… और फिर हैवानियत: जब रक्षक ही बन गया भक्षक

राजकोट: गुजरात के राजकोट जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को तार-तार कर दिया है। जेतपुर तालुका के एक गांव में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक 14 वर्षीय किशोर पर अपनी ही 6 साल की मासूम चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म करने का संगीन आरोप लगा है। यह घटना उस वक्त हुई जब मासूम बच्ची अपने भाई पर भरोसा कर उसके साथ खेलने घर की छत पर गई थी, लेकिन उसे क्या पता था कि उसका अपना भाई ही उसके लिए यमराज बन जाएगा।

15 दिन तक खामोश रही बच्ची, पेट दर्द ने बयां की दास्तां

​वारदात के बाद बच्ची इतनी डर गई थी कि उसने घर में किसी को कुछ नहीं बताया। वह सहमी रही, लेकिन कुदरत को यह जुल्म मंजूर नहीं था।

  • असहनीय दर्द: करीब दो हफ्ते बाद बच्ची के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ। उसने खाना-पीना छोड़ दिया और उसकी हालत बिगड़ने लगी।
  • डॉक्टरों का खुलासा: परिजन उसे तुरंत सरकारी अस्पताल ले गए। वहां जब डॉक्टरों ने गहन जांच (Medical Examination) की, तो वे भी सन्न रह गए। रिपोर्ट में साफ हुआ कि बच्ची के साथ दरिंदगी हुई है।

पुलिस की कार्रवाई: कानून के शिकंजे में किशोर

​डॉक्टरों की रिपोर्ट मिलते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत जेतपुर तालुका पुलिस को सूचना दी।

पुलिस का बयान: “मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत FIR दर्ज कर ली गई है। आरोपी नाबालिग है, इसलिए बाल सुधार गृह और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।”

VOB का नजरिया: इंटरनेट की गंदगी या संस्कारों की कमी?

राजकोट की यह घटना समाज के लिए एक ‘अलार्म’ है। 14 साल का बच्चा, जो खुद अभी किशोर है, वह इतनी घिनौनी वारदात को अंजाम कैसे दे सकता है? यह सवाल खड़ा करता है हमारे सोशल मीडिया कंटेंट, बच्चों की अनियंत्रित इंटरनेट पहुंच और घटते पारिवारिक मूल्यों पर। जब घर के भीतर ही बच्चे सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो समाज कहाँ जाएगा? यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने के टूटने की गवाही है।

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