HIGHLIGHTS:
- नई कमान: विवेकानंद गुप्ता बने भागलपुर जदयू के नए जिलाध्यक्ष; पार्टी नेतृत्व ने जताया भरोसा।
- जश्न का माहौल: जदयू कार्यालय में ढोल-नगाड़े और मिठाई के साथ हुआ भव्य अभिनंदन समारोह।
- दिग्गजों की मौजूदगी: पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत मंडल और एससी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष महेश दास ने दी बधाई।
- मिशन 2026: सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना और संगठन विस्तार को बताया प्राथमिकता।
पार्टी दफ्तर में ‘नीतीश के सिपाही’ का जोश: विवेकानंद गुप्ता ने संभाली कमान
भागलपुर: रेशमी शहर भागलपुर में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपनी सांगठनिक धार को और तेज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व द्वारा विवेकानंद गुप्ता को भागलपुर का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। गुरुवार को भागलपुर स्थित जदयू कार्यालय किसी उत्सव के मैदान में तब्दील हो गया, जहाँ नए जिलाध्यक्ष के स्वागत में कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। फूलों की बारिश, बुके और “नीतीश कुमार जिंदाबाद” के नारों के साथ विवेकानंद गुप्ता का जोरदार अभिनंदन किया गया।
[नवागत जिलाध्यक्ष का विजन: 3 बड़ी प्राथमिकताएं]
पदभार संभालते ही विवेकानंद गुप्ता ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया:
- संगठन की मजबूती: बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और नए साथियों को जोड़ना।
- योजनाओं का प्रचार: नीतीश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और ‘सात निश्चय’ के लाभ को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना।
- कार्यकर्ताओं का सम्मान: पार्टी के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान की रक्षा करना।
“नीतीश कुमार की नीतियों को बनाएंगे जन-आंदोलन”
अपने संबोधन में विवेकानंद गुप्ता भावुक दिखे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा:
”मुख्यमंत्री जी ने मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ता पर जो भरोसा जताया है, मैं उसे अपनी पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। भागलपुर की धरती जदयू का गढ़ रही है और हम इसे और भी अभेद्य बनाएंगे। हमारा लक्ष्य साफ़ है— विकास की राजनीति को हर घर तक पहुँचाना।”
वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत मंडल ने कहा कि विवेकानंद गुप्ता के आने से युवाओं में नया जोश भरेगा और जिले में पार्टी का ग्राफ और ऊपर जाएगा।
VOB का नजरिया: क्या विवेकानंद गुप्ता बदलेंगे भागलपुर की सियासी तस्वीर?
भागलपुर जदयू में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य में ‘समृद्धि यात्रा’ और ‘सात निश्चय-3’ का शोर है। विवेकानंद गुप्ता की छवि एक मिलनसार और सक्रिय नेता की रही है। उनकी सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर के विभिन्न गुटों को एक मंच पर लाना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना होगा। कार्यकर्ताओं के भारी जमावड़े ने यह तो साबित कर दिया है कि शुरुआती ‘मोमेंटम’ उनके पक्ष में है।


