HIGHLIGHTS:
- बड़ा भुगतान: राज्य के 93.12 लाख छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में भेजी गई पोशाक की राशि।
- बजट: मुख्यमंत्री बालिका पोशाक और मुख्यमंत्री पोशाक योजना के तहत ₹1047.08 करोड़ का हुआ ट्रांजेक्शन।
- पारदर्शिता: डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे खातों में पहुंची राशि; 75% हाजिरी वालों को मिला लाभ।
- इतिहास: 2008-09 से शुरू हुई इस योजना ने बदला बिहार के सरकारी स्कूलों का चेहरा।
स्कूल जाने की बढ़ी चमक: खाते में आए पैसे, अब सिलेंगे नए कपड़े
पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए आज का दिन ‘संडे’ से भी ज्यादा खुशी वाला है। नीतीश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 8) के करीब 93 लाख 12 हजार छात्र-छात्राओं को स्कूल ड्रेस की राशि भेज दी है। शिक्षा विभाग ने बटन दबाकर एक साथ ₹1047.08 करोड़ की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा गरीबी के कारण बिना यूनिफॉर्म के स्कूल न आए।
[किसे मिले कितने पैसे? समझिए पूरा गणित]
योजना के तहत अलग-अलग कक्षाओं और श्रेणियों के लिए राशि तय की गई है। नीचे दी गई टेबल से आप समझ सकते हैं कि आपके बच्चे के खाते में कितनी राशि आई होगी:
1. मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना (छात्राओं के लिए)
|
कक्षा |
मिलने वाली राशि |
|---|---|
|
कक्षा 1 और 2 |
₹600 |
|
कक्षा 3 से 5 |
₹700 |
|
कक्षा 6 से 8 |
₹1,000 |
2. मुख्यमंत्री पोशाक योजना (छात्रों के लिए)
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कक्षा |
श्रेणी |
मिलने वाली राशि |
|---|---|---|
|
कक्षा 1-2 |
एपीएल (APL) |
₹400 |
|
कक्षा 1-2 |
एससी/एसटी/बीपीएल |
₹600 |
|
कक्षा 3-5 |
एपीएल (APL) |
₹500 |
|
कक्षा 3-5 |
एससी/एसटी/बीपीएल |
₹600 |
|
कक्षा 6-8 |
सभी वर्ग के छात्र |
₹700 |
75% हाजिरी अनिवार्य: केवल ‘पढ़ने वालों’ को मिला इनाम
सरकार ने इस बार नियमों में सख्ती बरती है। विभाग के मुताबिक, यह राशि केवल उन्हीं छात्र-छात्राओं को मिली है जिनकी विद्यालय में कम से कम 75 फीसदी उपस्थिति रही है।
- फायदा: इससे स्कूलों में बच्चों के ड्रॉपआउट रेट में कमी आई है और नियमित उपस्थिति बढ़ी है।
- दायरा: इस भुगतान में राजकीय, राजकीयकृत और गैर सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) सभी प्रारंभिक विद्यालय शामिल हैं।
[VOB इन्फो-ग्राफिक्स: योजना का सफरनामा]
शुरुआत: वर्ष 2008-09 (मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना)।
उद्देश्य: सामाजिक समानता लाना और बच्चों में स्कूल के प्रति उत्साह जगाना।
तकनीक: पहले चेक या नकद मिलता था, अब सीधे बैंक खाता (Direct Benefit Transfer)।
VOB का नजरिया: ‘ड्रेस’ से बढ़ता है ‘कॉन्फिडेंस’!
बिहार सरकार का यह कदम केवल वित्तीय मदद नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के आत्म-सम्मान से जुड़ा है। ₹1000 करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे खातों में भेजना प्रशासनिक चुस्ती को दर्शाता है। हालांकि, 75% हाजिरी की शर्त उन गरीब बच्चों के लिए थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है जो खेती या अन्य कामों में हाथ बंटाते हैं, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह अनुशासन जरूरी है। अब जिम्मेदारी अभिभावकों की है कि वे इस राशि का उपयोग केवल बच्चों की यूनिफॉर्म के लिए ही करें।


