अब ब्लॉक में ही होगा ‘स्पेशलिस्ट’ इलाज! बिहार सरकार का बड़ा फैसला; CHC में तैनात होंगे 1080 आंख और नाक-कान-गला के डॉक्टर, पटना दौड़ने की टेंशन खत्म

HIGHLIGHTS:

  • बड़ा फैसला: प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को ‘स्पेशियलिटी अस्पताल’ बनाने की तैयारी।
  • बंपर बहाली: 540 नेत्र रोग और 540 ENT विशेषज्ञों के पद सृजित; कुल 1080 डॉक्टरों की होगी नियुक्ति।
  • सात निश्चय-3: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ₹155 करोड़ का सालाना बजट पास।
  • राहत: अब मोतियाबिंद या गले की बीमारी के लिए जिला अस्पताल या राजधानी के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

ग्रामीण स्वास्थ्य में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: घर की दहलीज पर मिलेंगे विशेषज्ञ

पटना: बिहार के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए आज स्वास्थ्य विभाग से एक ‘सुपर’ खुशखबरी आई है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को विकेंद्रीकृत (Decentralize) करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। अब आपको आंख, नाक, कान या गले की बीमारी के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय-3’ के तहत अब राज्य के हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी।

[नया हेल्थ ढांचा: सृजित पदों का पूरा गणित]

​सरकार ने राज्य के 534 प्रखंडों और अन्य 6 केंद्रों को मिलाकर कुल 540 CHC के लिए विशेष पदों को मंजूरी दी है:

विशेषज्ञ विभाग

सृजित पदों की संख्या

वितरण प्रति CHC

कुल वार्षिक व्यय

नेत्र रोग (Eye Specialist)

540

01 डॉक्टर

₹155,06,89,920

ENT (नाक-कान-गला विशेषज्ञ)

540

01 डॉक्टर

(उपरोक्त बजट में शामिल)

कुल पद

1080

02 डॉक्टर

~ ₹155.06 करोड़

क्यों जरूरी था यह फैसला?

​अब तक भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुसार CHC पर केवल जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग और शिशु रोग विशेषज्ञ ही तैनात थे। लेकिन आंखों की रोशनी या गले-कान के संक्रमण के लिए ग्रामीणों को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों या महंगे प्राइवेट क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता था।

  • समय और पैसा: स्थानीय स्तर पर इलाज होने से मरीजों की आर्थिक बचत होगी।
  • समय पर इलाज: मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का समय पर ऑपरेशन होने से अंधेपन की समस्या कम होगी।

स्पेशियलिटी अस्पताल बनने की ओर ‘प्रखंड’

​स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव द्वारा महालेखाकार को भेजे गए पत्र के अनुसार, इन नियुक्तियों से CHC का स्तर बढ़कर स्पेशियलिटी अस्पताल के समान हो जाएगा। यहाँ पहले से ही एनेस्थेटिस्ट (मूर्छक) मौजूद हैं, जिससे अब छोटी सर्जरी और विशेषज्ञ परामर्श ब्लॉक स्तर पर ही संभव होगा।

VOB का नजरिया: पद तो बन गए, क्या डॉक्टर मिलेंगे?

सरकार का यह फैसला कागजों पर किसी ‘क्रांति’ से कम नहीं है। 1080 विशेषज्ञ पदों का सृजन बिहार की ग्रामीण आबादी के लिए बड़ी राहत है। लेकिन यहाँ असली चुनौती ‘भर्ती’ और ‘रिटेंशन’ की है। बिहार में पहले से ही विशेषज्ञों की कमी है, ऐसे में क्या सरकार इन 1080 पदों को समय पर भर पाएगी? और क्या ये विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में रुककर सेवा देने को तैयार होंगे? अगर सरकार इन दो सवालों का जवाब ढूंढ लेती है, तो ‘सात निश्चय-3’ वाकई बिहार की तस्वीर बदल देगा।

  • Related Posts

    दालकोला चेकपोस्ट पर परिवहन मंत्री का औचक निरीक्षण, राजस्व लक्ष्य पूरा करने और व्यवस्था सुधारने के दिए सख्त निर्देश

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    सारण की मुखिया प्रियंका सिंह को राष्ट्रीय सम्मान, ‘सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान’ में उत्कृष्ट महिला पंचायत नेता के रूप में हुईं सम्मानित

    Share Add as a preferred…

    Continue reading