अब ‘डेटा’ लिखेगा विकसित बिहार की तकदीर! विभागों के बीच बंटेगी जानकारी; ACS विजयलक्ष्मी बोलीं- “बिना सटीक आंकड़ों के सुशासन अधूरा”

HIGHLIGHTS:

  • डिजिटल मास्टरस्ट्रोक: योजना एवं विकास विभाग ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based Policy) के लिए बुलाई बड़ी बैठक।
  • कनेक्टिविटी: अलग-अलग विभागों के डेटा को जोड़कर योजनाओं की होगी निगरानी; गड़बड़ी की गुंजाइश होगी खत्म।
  • लक्ष्य 2047: ‘विकसित बिहार @2047’ के सपने को पूरा करने के लिए ‘प्रशासनिक आंकड़ों’ का होगा वैज्ञानिक विश्लेषण।
  • नेशनल मिशन: अप्रैल 2026 में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Data for Development’ की तैयारी शुरू।

फाइलों से बाहर निकलकर ‘डेटा’ बोलेगा हकीकत: पटना में हाई-लेवल कार्यशाला

पटना: बिहार सरकार अब योजनाओं को केवल ‘अंदाजे’ पर नहीं, बल्कि ‘ठोस आंकड़ों’ के आधार पर जमीन पर उतारेगी। राजधानी पटना में योजना एवं विकास विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय परामर्श कार्यशाला में सुशासन के एक नए मॉडल पर चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने स्पष्ट कर दिया कि अगर बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में अग्रणी रहना है, तो प्रशासनिक आंकड़ों का समन्वित उपयोग अनिवार्य है।

[डेटा लिंकिंग: क्यों है यह ‘गेमचेंजर’?]

​अक्सर देखा जाता है कि एक ही लाभार्थी का डेटा अलग-अलग विभागों में अलग-अलग होता है। अब सरकार इन्हें आपस में जोड़ने (Linking) जा रही है:

  • सटीक मॉनिटरिंग: योजनाओं का लाभ असली हकदार तक पहुँच रहा है या नहीं, इसका रियल-टाइम आकलन होगा।
  • सुधारात्मक कदम: डेटा विश्लेषण से पता चलेगा कि किस क्षेत्र में योजना पिछड़ रही है, ताकि तुरंत सुधार किया जा सके।
  • साक्ष्य-आधारित नीति: अब नीतियां केवल दफ्तरों में नहीं, बल्कि जमीन से मिले ‘साइंटिफिक डेटा’ के आधार पर बनेंगी।

[कार्यशाला में जुटे दिग्गजों का जमावड़ा]

​इस बैठक में केंद्र और राज्य के सांख्यिकी विशेषज्ञों ने अपना अनुभव साझा किया:

नाम

पद

विभाग/संस्था

डॉ. एन. विजयलक्ष्मी

अपर मुख्य सचिव

योजना एवं विकास विभाग, बिहार

श्री कंवल तनुज

सचिव

योजना एवं विकास विभाग

श्री रौशन लाल साहू

उप महानिदेशक

NSO (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय)

श्री महेश चंद्र शुक्ला

निदेशक

DIID (सांख्यिकी मंत्रालय, नई दिल्ली)

श्री राम नारायण यादव

निदेशक

नेशनल इंटेलिजेंट ग्रिड, नई दिल्ली

‘विकसित बिहार @2047’ का रोडमैप तैयार

​एसीएस विजयलक्ष्मी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य के विभागों के पास आंकड़ों का विशाल भंडार है। जरूरत है उन्हें एक सूत्र में पिरोने की।

​”प्रशासनिक आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण न केवल नीति निर्माण बल्कि योजनाओं के मूल्यांकन के लिए भी संजीवनी है। इससे हम ‘विकसित बिहार @2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा सकेंगे।” — डॉ. एन. विजयलक्ष्मी (ACS)

दिल्ली तक गूंजेंगे बिहार के सुझाव

​यह कार्यशाला भारत सरकार द्वारा अप्रैल 2026 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन “Data for Development” की पूर्व तैयारी है। पटना में प्राप्त हुए सुझावों और अनुभवों को अब राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाएगा, जिससे डेटा मैनेजमेंट के क्षेत्र में बिहार की एक नई पहचान बनेगी।

VOB का नजरिया: डेटा ही नया तेल (Oil) है!

बिहार सरकार का यह कदम दूरदर्शिता भरा है। अक्सर योजनाओं की विफलता का बड़ा कारण गलत डेटा या विभागों के बीच तालमेल की कमी होती है। अगर स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे विभागों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर आता है, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी खजाने के एक-एक पैसे का हिसाब रहेगा। ‘साक्ष्य-आधारित शासन’ की यह पहल बिहार को डिजिटल क्रांति के अगले स्तर पर ले जा सकती है।

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