HIGHLIGHTS:
- एक्शन मोड: लापरवाही पर भागलपुर सदर और नवगछिया के प्रधान सहायकों का वेतन रोका।
- अल्टीमेटम: प्रधानमंत्री आवास योजना के सत्यापन के लिए दिया महज 3 दिन का समय।
- LPG संकट: गैस एजेंसियों पर तैनात होंगे सरकारी ‘जासूस’, जमाखोरी की तो खैर नहीं।
- जुर्माना: बायो वेस्ट कचरा उठाने में ढिलाई पर ‘सी एनर्जी’ पर लगा भारी फाइन।
समीक्षा भवन में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: जिलाधिकारी ने अफसरों की लगाई क्लास
भागलपुर: विकास कार्यों में ढिलाई बरतने वाले बाबुओं और अफसरों के लिए आज का दिन भारी रहा। भागलपुर के जिलाधिकारी (DM) डॉ. नवल चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक ‘समीक्षा’ से ज्यादा ‘कार्रवाई’ वाली रही। डीएम ने साफ कर दिया कि फाइलों को दबाकर बैठने और समय पर सूचना न देने वाले कर्मियों के लिए प्रशासन में कोई जगह नहीं है।
[लापरवाही की सजा: वेतन बंद और स्पष्टीकरण]
डीएम ने भागलपुर सदर और नवगछिया के अनुमंडल कार्यालय तथा भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) कार्यालय के प्रधान सहायकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
- सजा: नियंत्री पदाधिकारी को समय पर सूचना न देने के कारण इनका वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।
- जवाब-तलब: संबंधित नियंत्री पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन सहायकों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगें।
LPG संकट और जमाखोरी: एजेंसियों पर रहेगा ‘पहरा’
पश्चिम एशिया संकट के बीच गैस की किल्लत को देखते हुए डीएम ने सभी मार्केटिंग ऑफिसर्स (MOs) को कड़ा निर्देश दिया है।
DM का ‘गैस’ फरमान: “सभी एमओ गैस गोदामों और एजेंसियों पर अपने आदमी तैनात करें। एक-एक सिलेंडर की मॉनिटरिंग हो ताकि कोई भी रसूखदार या बिचौलिया अनावश्यक जमाखोरी न कर सके।”
शिक्षा और स्वास्थ्य: PM-Shri और सदर अस्पताल
- आदर्श विद्यालय: जिले के 25 स्कूलों को ‘पीएम श्री’ योजना के तहत चुना गया है। शेष हर प्रखंड में एक आदर्श विद्यालय बनाया जाएगा।
- संस्थागत प्रसव: स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि सदर अस्पताल में ही शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए, ताकि रेफरल का बोझ कम हो।
गंदगी फैलाने वाली एजेंसी पर ‘चाबुक’
नगर आयुक्त ने शिकायत की कि ‘सी एनर्जी’ बायो वेस्ट कचरा उठाने में लापरवाही बरत रही है। इस पर डीएम ने तुरंत एक्शन लेते हुए एजेंसी पर जुर्माना अधिरोपित करने और विभाग को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश करने का निर्देश दिया।
VOB का नजरिया: कागजी विकास नहीं, ‘जमीनी’ हकीकत चाहिए!
भागलपुर डीएम का यह सख्त अंदाज स्वागत योग्य है। प्रधान सहायकों का वेतन रोकना और बीईओ से स्पष्टीकरण मांगना यह संदेश है कि अब ‘ऊपर से सब ठीक है’ वाले रिपोर्ट कार्ड नहीं चलेंगे। विशेषकर गैस किल्लत के समय एमओ को गोदामों पर तैनात करना एक प्रो-एक्टिव कदम है। हालांकि, जमीन की समस्या सालों पुरानी है, क्या केवल निर्देश से अंचलाधिकारी जमीन ढूंढ पाएंगे? यह आने वाला वक्त बताएगा।


