सहरसा में ‘खूनी’ दांपत्य का अंत! पति ने पत्नी का किया कत्ल, फिर खुद भी दी जान; तीन मासूमों के सिर से उठा साया

HIGHLIGHTS:

  • सनसनीखेज: बनगांव थाना क्षेत्र में पति-पत्नी के शव मिलने से मचा हड़कंप।
  • खौफनाक वारदात: दिल्ली से मजदूरी कर लौटे रमन ने पत्नी सोनी की हत्या कर खुदकुशी की।
  • अनाथ हुए बच्चे: तीन बच्चों के सिर से एक ही झटके में छिना मां-बाप का आंचल।
  • पुलिस एक्शन: सदर एसडीपीओ आलोक कुमार ने संभाली जांच की कमान।

हंसता-खेलता परिवार बना ‘शमशान’: सहरसा के बनगांव में मातम

सहरसा: बिहार के सहरसा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। बनगांव थाना क्षेत्र के नगर पंचायत वार्ड नंबर 17 में बुधवार की सुबह उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब एक घर से पति और पत्नी के शव बरामद हुए। किसी को अंदाजा नहीं था कि दिल्ली में खून-पसीना एक कर परिवार पालने वाला शख्स अपनी ही जीवनसंगिनी का काल बन जाएगा और फिर खुद भी मौत को गले लगा लेगा।

[वारदात का ब्यौरा: एक नजर में]

विवरण

जानकारी

मृतक (पति)

रमन खां (40 वर्ष), दिल्ली में मजदूर

मृतक (पत्नी)

सोनी देवी (38 वर्ष)

घटनास्थल

वार्ड नंबर 17, नगर पंचायत, बनगांव

वजह (संभावित)

घरेलू तनाव और आपसी विवाद

पीछे छूटे

तीन मासूम बच्चे (अनाथ)

मजदूरी की थकान और ‘खूनी’ तनाव: क्या हुआ उस रात?

​जानकारी के मुताबिक, रमन खां दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था और अपनी कमाई से सहरसा में रह रहे परिवार का पेट पालता था। पत्नी सोनी देवी घर पर रहकर तीनों बच्चों की देखभाल करती थी।

  • आशंका: पुलिस और ग्रामीणों को अंदेशा है कि पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर गहरा तनाव था।
  • वारदात: बुधवार की सुबह जब बच्चों ने माता-पिता को बेसुध देखा, तो शोर मचाया। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर देखा कि सोनी की हत्या की गई थी और रमन ने भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी।

एसडीपीओ का बयान: “पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार”

​घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ आलोक कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। एसडीपीओ ने बताया:

​”शुरुआती जांच में मामला हत्या के बाद आत्महत्या का लग रहा है। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं कि आखिर वह कौन सी वजह थी जिसने रमन को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।”

VOB का नजरिया: पलायन का दर्द या आपसी अविश्वास?

सहरसा की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक और मानसिक दबाव की कहानी है जिसे ‘प्रवासी मजदूर’ और उनका परिवार झेलता है। महीनों दूर रहकर मजदूरी करना और घर की छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता तनाव कभी-कभी इतना घातक हो जाता है कि इंसान विवेक खो देता है। रमन और सोनी तो चले गए, लेकिन उन तीन मासूमों का क्या कसूर था जिनका भविष्य अब अंधकार में डूब गया है? पुलिस की जांच शायद कानूनी सच सामने ले आए, लेकिन ये बच्चे कभी इस ‘खूनी सच’ को नहीं भूल पाएंगे।

  • Related Posts

    जदयू दफ्तर में ‘निशांत’ की धमक! सदस्यता के चौथे दिन ही संभाला मोर्चा; कार्यकर्ताओं से बोले- “युवाओं को जोड़ो, पिता के काम को घर-घर पहुंचाओ”

    Share Add as a preferred…

    Continue reading