HIGHLIGHTS:
- तारीख नोट करें: 14 मार्च को भागलपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकार आयोजित करेगा लोक अदालत।
- बड़ी राहत: बिजली बिल, बैंक लोन और ट्रैफिक चालान जैसे मामलों का मौके पर होगा निपटारा।
- तैयारी पूरी: भागलपुर, कहलगांव और नवगछिया में कुल 27 बेंचों का गठन; गांव-गांव घूमेगा जागरूकता रथ।
तारीख मुकर्रर, इंसाफ होगा फटाफट: भागलपुर कोर्ट में सजेगी अदालत
भागलपुर | 11 मार्च, 2026: अगर आप भी कचहरी के चक्कर काट-काटकर परेशान हैं या बैंक और बिजली विभाग के साथ आपका विवाद बरसों से लटका है, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। भागलपुर में आगामी 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का महाकुंभ लगने जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस लोक अदालत का मकसद मुकदमों के बोझ को कम करना और आम आदमी को ‘सुलह’ का रास्ता दिखाना है। बुधवार को भागलपुर व्यवहार न्यायालय परिसर से इसके लिए जागरूकता रथ (प्रचार वाहन) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
जागरूकता रथ पहुँचाएगा ‘इंसाफ’ का संदेश
बुधवार को प्रधान न्यायाधीश के नेतृत्व में कई न्यायिक पदाधिकारियों ने प्रचार वाहन को रवाना किया।
- गांव से शहर तक: यह वाहन केवल शहर की गलियों में नहीं, बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में भी जाएगा।
- मकसद: लोगों को यह समझाना कि आपसी सहमति से विवाद सुलझाना न केवल समय बचाता है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी मान्य और अंतिम होता है।
कहाँ-कहाँ बैठेंगी बेंच? [इंसाफ का मैप]
लोक अदालत को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बेंचों का बंटवारा कुछ इस प्रकार है:
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कोर्ट का नाम |
बेंचों की संख्या |
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भागलपुर व्यवहार न्यायालय |
20 बेंच |
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नवगछिया कोर्ट |
05 बेंच |
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कहलगांव कोर्ट |
02 बेंच |
किन मामलों का होगा ‘परमानेंट सेटलमेंट’?
इस लोक अदालत में मुख्य रूप से इन लंबित मामलों की सुनवाई होगी:
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- बिजली विभाग: बिल से संबंधित पुराने विवाद।
- बैंक रिकवरी: लोन और ईएमआई से जुड़े मामले।
- ट्रैफिक: पुलिस द्वारा काटे गए पेंडिंग चालान।
- अन्य: सुलह योग्य फौजदारी और दीवानी मामले।
VOB का नजरिया: बिना ‘तारीख’ वाला इंसाफ!
लोक अदालत उन लोगों के लिए एक वरदान है जो अदालती खर्च और सालों चलने वाली तारीखों से बचना चाहते हैं। भागलपुर पुलिस और न्यायिक विभाग की यह पहल सराहनीय है, क्योंकि यह ‘न्याय सबके लिए’ के सिद्धांत को धरातल पर उतारती है। अगर आपके पास भी कोई नोटिस आया है या आपका विवाद लंबित है, तो 14 मार्च का मौका न चूकें। याद रखिए, सुलह से बढ़कर कोई जीत नहीं होती।


