मोतिहारी में फर्जी फिंगरप्रिंट से नौजवानों को बनाया जा रहा था ‘बुजुर्ग’, पेंशन घोटाले का पर्दाफाश

बड़ी खबरें एक नज़र में:

  • बड़ा खुलासा: ‘मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना’ में करोड़ों के फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड गिरफ्तार।
  • मोडस ऑपेरंडी: कम उम्र के लड़कों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर आधार में बढ़ाई जा रही थी उम्र।
  • बरामदगी: भारी मात्रा में आधार कार्ड, लैपटॉप और ‘डेमो फिंगरप्रिंट’ बरामद; पुलिस भी दंग।

डिजिटल डकैती: सरकारी खजाने पर ‘साइबर’ चोट!

​​मोतिहारी | 11 मार्च, 2026: बिहार के मोतिहारी में साइबर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो कागजों पर नौजवानों को ‘बुजुर्ग’ बनाकर सरकार की तिजोरी में सेंध लगा रहा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी ‘वृद्धजन पेंशन योजना’ को निशाना बनाकर यह गिरोह सक्रिय था। पचपकड़ी थाना क्षेत्र के बशहीं और भंडार गांव में बैठकर इस काले खेल को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस की इस दबिश ने साबित कर दिया है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सरकारी धन की लूट के लिए भी किया जा रहा है।

नौजवानों को ‘बूढ़ा’ बनाने वाली फैक्ट्री: ऐसे होता था खेल

​साइबर डीएसपी अभिनव पाराशर ने इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया तो सब हैरान रह गए।

  • उम्र का हेर-फेर: गिरोह के सदस्य जितना, बनकटवा और पचपकड़ी इलाके के कम उम्र के युवकों को पकड़ते थे।
  • फर्जी सर्टिफिकेट: सबसे पहले उनका फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाया जाता था।
  • आधार में अपडेट: उस फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर ‘आधार कार्ड’ में उम्र बढ़ाकर उन्हें 60 साल से ऊपर का दिखाया जाता था।
  • बायोमेट्रिक फर्जीवाड़ा: पेंशन के वेरिफिकेशन के लिए फर्जी और डेमो फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर पोर्टल पर उन्हें रजिस्टर कर दिया जाता था।

साइबर पुलिस का छापा: बरामद हुआ ‘अपराध का शस्त्रागार’

​गुप्त सूचना के आधार पर साइबर थाने की पुलिस ने भंडार गांव में छापेमारी की। जहाँ से इस रैकेट के एक सक्रिय सदस्य को दबोच लिया गया। मौके से जो सामान मिला, वह किसी आधुनिक लैब से कम नहीं था:

  • ​भारी संख्या में आधार कार्ड और वृद्धा पेंशन के भरे हुए फॉर्म।
  • ​फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और लैपटॉप।
  • 03 डेमो फिंगरप्रिंट और फिंगरप्रिंट स्कैनर।
  • ​मोबाइल वेबकेम और हाई-क्वालिटी कैमरे।

इनकी तलाश में खाकी की छापेमारी: फरार हुए ‘खिलाड़ी’

​डीएसपी अभिनव पाराशर ने बताया कि गिरफ्तार युवक से कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस गिरोह के तार काफी गहरे जुड़े हैं। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है, जिनमें शामिल हैं:

  1. संदीप यादव
  2. सुमन यादव
  3. फेकू यादव (साह)
  4. धीरज यादव

​पुलिस का मानना है कि इन चारों की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो पाएगा कि अब तक कितने अपात्र लोगों को फर्जी तरीके से पेंशन का लाभ दिलाया गया है और इस लूट में प्रखंड स्तर के किन अधिकारियों की मिलीभगत है।

VOB का नजरिया: क्या बायोमेट्रिक भी अब सुरक्षित नहीं?

मोतिहारी की यह घटना डराने वाली है। जिस बायोमेट्रिक सिस्टम को ‘फुलप्रूफ’ मानकर सरकारी योजनाओं का आधार बनाया गया, अपराधी उसमें भी ‘डेमो फिंगरप्रिंट’ के जरिए सेंध लगा रहे हैं। बुजुर्गों के हक का पैसा उन लोगों की जेब में जा रहा था जिनकी दाढ़ी भी अभी ठीक से नहीं आई है। पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल बैंक और आधार अपडेट सेंटर्स पर भी है— आखिर इतनी बड़ी संख्या में उम्र का फर्जीवाड़ा उनकी पकड़ में क्यों नहीं आया?

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