पूर्व RJD विधायक अरुण यादव पर ED का ‘महा-प्रहार’! 36 करोड़ की ‘काली कमाई’ का खुलासा, पत्नी समेत 5 पर चार्जशीट दायर; बालू के खेल में बना ली थी ‘कुबेर की तिजोरी’

HIGHLIGHTS:

  • बड़ा एक्शन: संदेश के पूर्व विधायक अरुण यादव और उनकी पत्नी किरण देवी के खिलाफ ED ने दाखिल की चार्जशीट।
  • अवैध धन: ₹2.65 करोड़ की वैध आय, लेकिन बना डाली ₹39.31 करोड़ की संपत्ति; ₹36.66 करोड़ का हिसाब गायब।
  • मोडस ऑपेरंडी: अवैध बालू खनन के पैसे को डेयरी और पशुपालन के जरिए ‘सफेद’ करने का खेल बेनकाब।

बालू से ‘सोना’ बनाने का खेल: ED के शिकंजे में संदेश का ‘रसूखदार’ परिवार

पटना: बिहार की राजनीति में ‘बालू’ के खेल ने कई साम्राज्य खड़े किए हैं, लेकिन अब उन पर ED (प्रवर्तन निदेशालय) की टेढ़ी नजर पड़ चुकी है। संदेश के पूर्व राजद विधायक अरुण यादव उर्फ अरुण कुमार सिंह और उनकी पत्नी किरण देवी की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। मंगलवार को पटना की विशेष PMLA अदालत में ED ने इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। कैसे एक छोटे से समय में ‘बालू के अवैध खनन’ के दम पर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया गया, इसका पूरा कच्चा चिट्ठा अब कोर्ट के सामने है।

कमाई 2 करोड़ और संपत्ति 39 करोड़: ED का ‘गणित’ देख चकरा जाएगा सिर!

​ED ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच अरुण यादव और उनके परिवार की चल-अचल संपत्ति का जो हिसाब लगाया है, वह चौंकाने वाला है:

  • वैध आय: मात्र ₹2.65 करोड़ (घोषित आय)।
  • अर्जित संपत्ति: ₹39.31 करोड़ (वास्तविक संपत्ति)।
  • आय से अधिक संपत्ति: ₹36.66 करोड़ (करीब 1400% अधिक)।

काली कमाई को ‘सफेद’ करने का ‘डेयरी फॉर्मूला’

​जांच में सामने आया है कि इस अवैध धन को सिस्टम में खपाने के लिए आरोपियों ने बड़े शातिर तरीके अपनाए।

  1. डेयरी और पशुपालन: अवैध रूप से कमाए गए कैश (नकद) को डेयरी और पशुपालन से हुई आय बताकर बैंकों में जमा किया गया।
  2. शेल कंपनी का खेल: ‘किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए पैसों को घुमाया गया (Layering) ताकि वे कानूनी रूप से वैध लगें।
  3. रियल एस्टेट में निवेश: इस ‘लॉन्डर्ड’ पैसे से पटना में कीमती व्यावसायिक भूखंड, फ्लैट और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि खरीदी गई।

अब तक की कार्रवाई: 21 करोड़ की संपत्ति पहले ही जब्त

​ED ने इस मामले में पहले ही अपना शिकंजा कस रखा था। 27 फरवरी 2024 को अरुण यादव और उनकी कंपनी के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद ₹21.38 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया जा चुका है। मंगलवार को दाखिल चार्जशीट में राजेश कुमार रंजन और दीपु कुमार को भी आरोपी बनाया गया है।

VOB का नजरिया: ‘गाय और भैंस’ के दूध से करोड़ों की लॉन्ड्रिंग?

बिहार में यह पहली बार नहीं है जब भ्रष्टाचार के पैसों को ‘पशुपालन’ के जरिए छिपाने की कोशिश की गई हो। अरुण यादव का यह मामला बताता है कि कैसे ‘सफेदपोश’ लोग बालू के अवैध कारोबार से निकलने वाले काले धन को खेती और डेयरी के नाम पर सिस्टम में इंजेक्ट करते हैं। 36 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का यह आंकड़ा केवल एक बानगी है; अगर पूरे प्रदेश के ‘बालू सिंडिकेट’ की जांच हो, तो शायद ऐसे कई ‘कुबेर’ जेल की सलाखों के पीछे होंगे। फिलहाल, संदेश के इस पूर्व विधायक के लिए आगे की राह काफी पथरीली होने वाली है।

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