बिहार में राजस्व ‘संग्राम’! 22 जिलों में ताला, लेकिन 35% अंचलों में ‘न्यू कमर’ बचा रहे साख; जानें आपके जिले का क्या है हाल?

HIGHLIGHTS:

  • बड़ी खबर: राजस्व सेवा महासंघ की हड़ताल से बिहार बेहाल, 22 जिलों में ठप पड़ा जमीन का काम।
  • राहत: नए अंचलाधिकारी (CO) हड़ताल से दूर, मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर समेत 7 जिलों में दफ्तर गुलजार।
  • नुकसान: दाखिल-खारिज और परिमार्जन की फाइलें अटकीं, आम जनता ब्लॉक के चक्कर काटने को मजबूर।

दो फाड़ हुई हड़ताल? पुराने अड़े, नए काम पर चढ़े!

पटना: बिहार राजस्व सेवा महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं, लेकिन इस आंदोलन के बीच एक बड़ी ‘दरार’ भी नजर आ रही है। जहाँ एक तरफ राज्य के 22 जिलों में हड़ताल का व्यापक असर है और सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है, वहीं दूसरी तरफ लगभग 30-35 फीसदी अंचलाधिकारी ऐसे भी हैं जिन्होंने हड़ताल को ठेंगा दिखा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि हड़ताल से दूरी बनाने वाले ये अधिकतर ‘नए नवेले’ अंचलाधिकारी हैं, जो दफ्तरों में बैठकर फाइलों का निपटारा कर रहे हैं।

इन 7 जिलों में ‘सब चंगा सी’: यहाँ हड़ताल फेल!

​बिहार के सात जिले ऐसे हैं जहाँ हड़ताल का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। यहाँ के अंचलाधिकारी अपनी कुर्सी पर डटे हुए हैं:

  • मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सुपौल, सहरसा, कटिहार, जमुई और मुंगेर। इन जिलों में सीओ (CO) काम कर रहे हैं, हालांकि मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जैसे जिलों में राजस्व कर्मियों की कमी के कारण परिमार्जन और दाखिल-खारिज का काम कछुए की चाल से चल रहा है।

जहाँ ‘पार्ट-टाइम’ चल रहा है काम: आंशिक असर वाले जिले

​कुछ जिले ऐसे भी हैं जहाँ ‘कहीं खुशी, कहीं गम’ वाला माहौल है। यहाँ कुछ अंचलों में काम हो रहा है तो कुछ में ताला लटका है:

  • नालंदा: 20 में से 10 सीओ काम पर हैं।
  • मधुबनी: केवल पंडौल, खजौली, राजनगर, रहिका और बेनीपट्टी में कामकाज जारी।
  • पटना: बिहटा और मोकामा के सीओ हड़ताल से बाहर हैं।
  • अन्य: सीतामढ़ी (2 सीओ), किशनगंज (2 सीओ), भोजपुर, अररिया, कैमूर और रोहतास में भी इक्का-दुक्का अंचलों में काम चल रहा है।

सावधान! इन 22 जिलों में जाने से बचें, यहाँ ‘काम बंद’ है

​अगर आप जमीन से जुड़े काम के लिए घर से निकल रहे हैं, तो इन जिलों की लिस्ट देख लें, जहाँ हड़ताल ने रफ्तार रोक दी है:

बक्सर, जहानाबाद, बेगूसराय, वैशाली, मधेपुरा, खगड़िया, पूर्णिया, लखीसराय, बांका, भागलपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, दरभंगा, शिवहर, औरंगाबाद, गोपालगंज, नवादा, शेखपुरा, सारण, गया और अरवल।

 

क्या-क्या काम ठप? आम आदमी की बढ़ी मुश्किल

​हड़ताल के कारण ब्लॉक कार्यालयों में भ्रष्टाचार के साथ-साथ फाइलों का अंबार लग गया है। मुख्य रूप से ये सेवाएं प्रभावित हैं:

    1. दाखिल-खारिज (Mutation)
    2. परिमार्जन (Land Record Correction)
    3. ई-मापी और एलपीसी (LPC)
    4. अभियान बसेरा

VOB का नजरिया: ‘सिस्टम’ की लड़ाई में जनता की ‘पिटाई’!

राजस्व विभाग और कर्मचारियों की यह लड़ाई अब सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और वक्त पर भारी पड़ रही है। नए सीओ का काम पर लौटना सरकार के लिए राहत की बात हो सकती है, लेकिन बिना ‘राजस्व कर्मियों’ के वे भी अधूरे हैं। मार्च का महीना क्लोजिंग का होता है, ऐसे में अगर यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो बिहार का राजस्व लक्ष्य तो डूबेगा ही, जनता का सरकारी तंत्र से भरोसा भी उठ जाएगा।

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