बिहार में पौधारोपण का नया रिकॉर्ड, एक साल में 40.68 लाख पौधे लगाए गए; हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

पटना : बिहार को हरित और पर्यावरण के अनुकूल राज्य बनाने की दिशा में सरकार को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में चलाए जा रहे व्यापक पौधारोपण अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025–26 में कुल 40.68 लाख पौधे लगाए गए हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक माना जा रहा है और इससे राज्य में हरित आवरण बढ़ाने के प्रयासों को नई गति मिली है।

यह जानकारी की ओर से दी गई है। विभाग के अनुसार यह उपलब्धि राज्य में चल रही कृषि वानिकी और अन्य प्रजातियों के पौधारोपण कार्यक्रमों के कारण संभव हो सकी है। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी उपलब्ध कराना है।

किसानों की भागीदारी से बढ़ा पौधारोपण अभियान

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक राज्य में किसानों को कृषि वानिकी योजना के तहत प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किसान अपनी निजी जमीन पर पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

इस अभियान के तहत किसानों को पौधों की उपलब्धता, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पौधारोपण की रफ्तार तेजी से बढ़ी है।

पिछले वर्षों की तुलना में तेज वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पौधारोपण के क्षेत्र में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

  • वर्ष 2024–25 में लगभग 32.57 लाख पौधे लगाए गए थे।
  • वर्ष 2023–24 में यह संख्या 19.07 लाख रही।
  • वर्ष 2022–23 में करीब 11.05 लाख पौधे लगाए गए।
  • वर्ष 2021–22 में 10.21 लाख पौधारोपण हुआ था।
  • जबकि 2020–21 में करीब 21.53 लाख पौधे लगाए गए थे।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हाल के वर्षों में राज्य में हरित अभियान को लेकर जागरूकता और भागीदारी दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

बांस के पौधों का भी किया गया वितरण

पौधारोपण अभियान को बढ़ावा देने के लिए कृषि वानिकी योजना के तहत किसानों के बीच 12,227 बांस के पौधे भी वितरित किए गए हैं। इन पौधों को किसानों के माध्यम से खेतों और आसपास के क्षेत्रों में लगाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित हो सकें।

यह पहल राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान के तहत संचालित की जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, हरित क्षेत्र का विस्तार और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना है।

2028 तक हरित आवरण बढ़ाने का लक्ष्य

वर्तमान में बिहार का हरित आवरण लगभग 15 प्रतिशत बताया जाता है। राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक इसे बढ़ाकर 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर जिले में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है और किसानों, सामाजिक संगठनों तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि पौधारोपण से न केवल हरित क्षेत्र में वृद्धि होती है, बल्कि भूगर्भीय जल स्तर में सुधार, वायु प्रदूषण में कमी और जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

राज्य में लगातार बढ़ते पौधारोपण अभियान से यह संकेत मिल रहा है कि बिहार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। आने वाले वर्षों में इस पहल से पर्यावरण संतुलन मजबूत होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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