1983 World Cup: भारतीय क्रिकेट पर लता जी का खास ‘अहसान’, जानकर आप भी करेंगे सलाम

भारतीय क्रिकेट टीम ने आज ही के दिन 40 साल पहले 25 जून 1983 को पहला विश्वकप जीता था। इस दिन कपिल देव की कप्तान वाली टीम ने मजबूत वेस्टइंडीज को फाइनल में हराकर अपना नाम इतिहास के पन्नों पर दर्ज कराकर अमर कर दिया था। इस खिताब के बाद भारत में क्रिकेट एक धर्म बना। इसका श्रेय महान गायिका रहीं लता मंगेशकर भी जाता है।

आप शायद इस बारे में नहीं जानते होंगे, लेकिन यकीन मानिए लता जी ने जो भारतीय क्रिकेट के लिए किया उसे जानकर आप भी उन्हें सलाम करेंगे। लता जी तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका अहसान क्रिकेट प्रेमियों को हमेशा याद रहेगा। दरअसल, जब टीम इंडिया ने 1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीता था तब आज की स्थिति में दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड BCCI के पास उस खिलाड़ियों को ईनाम देने के लिए पैसे तक नहीं थे।

BCCI के अध्यक्ष ने लता से जी मांगी थी मदद

BCCI के तत्कालीन अध्यक्ष एनकेपी साल्वे वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने वाले सभी खिलाड़ियों को पुरस्कार देना चाहते थे, लेकिन पैसों की कमी के चलते वह विवश थे। साल्वे ने इस गंभीर स्थिति से निकलने के लिए स्वर कोकिला लता मंगेशकर से मदद मांगी थी। लता जी भी क्रिकेट को पसंद करती थीं। इसलिए उन्होंने मदद के लिए हां कहा और भारतीय टीम की जीत के जश्न के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में लता मंगेशकर कॉन्सर्ट आयोजित किया गया।

latha for team india

लता जी ने नहीं लिया था एक भी पैसा

लता जी का यह कॉन्सर्ट काफी हिट रहा और इससे 20 लाख रुपए की कमाई हुई। खास बात ये रही कि उन्होंने गाने के लिए BCCI से एक भी पैसा नहीं लिया था। बाद में भारतीय टीम के सभी सदस्यों को इनाम के तौर पर एक-एक लाख रुपए दिए गए। इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा और उन्होंने खूब मेहनत करते हुए टीम के लिए बढ़िया योगदान दिया।

खिलाड़ियों ने लता जी के सुर में मिलाए थे सुर

इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में में हुए कॉन्सर्ट में लता मंगेशकर ने कई गाने गाए, लेकिन ‘भारत विश्व विजेता’ गाने को खूब सराहा गया। इस गाने का संगीत लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने दिया था, तो वहीं इसके बोल बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीतकार ‘इंदीवर’ ने लिखे‌ थे। खास बात यह है कि जब लता मंगेशकर मंच पर यह गाना गा रही थीं, तब भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी पीछे से लता जी के सुर में अपना सुर मिला रहे थे।

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