हाजीपुर कोर्ट परिसर में ‘फिल्मी’ ड्रामा: जेल जाने के खौफ में कैदी ने पहली मंजिल से तालाब में लगाई छलांग, गले पर कांच रख दी जान देने की धमकी

हाजीपुर: मंगलवार को वैशाली जिले का व्यवहार न्यायालय परिसर उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब अपहरण के एक मामले में पेशी के लिए लाए गए एक कैदी ने सुरक्षा घेरे को धता बताते हुए कोर्ट की पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। देखते ही देखते आरोपी परिसर के पीछे स्थित तालाब में जा कूदा और घंटों तक पुलिस प्रशासन को ‘नाक चने’ चबवाता रहा। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे को देखने के लिए कोर्ट परिसर में सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे घंटों कामकाज प्रभावित रहा।

तारीख: 10 मार्च 2026 | समय: पेशी के तुरंत बाद की घटना

वारदात: सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर मौत की छलांग

​मिली जानकारी के अनुसार, देसरी थाना क्षेत्र के बहुचर्चित अपहरण कांड (संख्या 416/2025) का मुख्य आरोपी पवन कुमार 1 जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। मंगलवार को उसे कड़ी सुरक्षा के बीच ACJM-11 की अदालत में पेशी के लिए लाया गया था।

​जैसे ही अदालत में सुनवाई पूरी हुई और आरोपी को वापस ले जाने की तैयारी हुई, पवन के चेहरे पर दोबारा जेल जाने का खौफ साफ दिखने लगा। इससे पहले कि पुलिसकर्मी उसे मजबूती से पकड़ पाते, उसने झटके से हाथ छुड़ाया और पहली मंजिल की रेलिंग फांदकर सीधे नीचे छलांग लगा दी।

तालाब बना ‘किला’, गले पर कांच की बोतल और मौत की धमकी

​छलांग लगाने के बाद आरोपी पवन भागते हुए कोर्ट परिसर के पीछे स्थित बड़े तालाब (पोखर) में कूद गया। जब पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेरा, तो आरोपी ने एक और घातक कदम उठाया। उसने तालाब में पड़ी कांच की एक टूटी बोतल उठा ली और उसे अपने गले पर सटा लिया।

​”अगर कोई करीब आया तो मैं खुद को खत्म कर लूंगा!”

 

​आरोपी की इस धमकी ने पुलिस के हाथ-पांव फुला दिए। पानी के बीचो-बीच झाड़ियों में छिपे आरोपी को बाहर निकालने के लिए पुलिस को घंटों मान-मनौव्वल करनी पड़ी। अंततः भारी मशक्कत और सूझबूझ के बाद जवानों ने उसे सुरक्षित दबोच लिया।

अधिकारी का आधिकारिक बयान (Official Version)

​हाजीपुर न्यायालय के लोक अभियोजक (PP) श्यामबाबु राय ने घटना की पुष्टि करते हुए विस्तार से बताया:

  • मामला: “यह देसरी थाना कांड संख्या 416/2025 से जुड़ा अपहरण का मामला है। आरोपी पवन कुमार पिछले दो महीनों से जेल में है।”
  • घटनाक्रम: “आज उसे ACJM-11 की अदालत में पेश किया गया था। पेशी के बाद जैसे ही उसे बाहर निकाला गया, वह भागने की नीयत से प्रथम तल से कूद गया। संयोग अच्छा था कि वह पोखर की ओर कूदा।”
  • सुरक्षा पर दावा: “हमारी कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। पुलिस की मुस्तैदी के कारण वह भागने में सफल नहीं हो सका और उसे परिसर के अंदर ही फिर से पकड़ लिया गया।”

सुरक्षा व्यवस्था पर उठते बड़े सवाल

​भले ही पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाई हो, लेकिन इस घटना ने हाजीपुर व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं:

  1. सुरक्षा में चूक: एक विचाराधीन कैदी पुलिस की मौजूदगी में पहली मंजिल से कैसे कूद गया?
  2. हथकड़ी का नियम: क्या पेशी के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जा रहा था?
  3. आपातकालीन तैयारी: क्या कोर्ट परिसर के पीछे के संवेदनशील हिस्सों (जैसे तालाब) की घेराबंदी पर्याप्त है?

वर्तमान स्थिति

​फिलहाल, आरोपी पवन कुमार को दोबारा हिरासत में लेकर मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस भागने की योजना में उसे बाहर से किसी का सहयोग मिल रहा था। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा ऑडिट की मांग तेज हो गई है।

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