ब्रेन हैमरेज के बाद पटना के निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज, 78 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
पटना: बिहार की राजनीति के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व विधायक सतीश कुमार का सोमवार को निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और पटना के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर मिलते ही नालंदा, शेखपुरा और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जाता है कि कुछ समय पहले उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ था, जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी। बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की लगातार निगरानी और इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। 78 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।
सतीश कुमार का जन्म वर्ष 1948 में हुआ था। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन जनता के मुद्दों को लेकर हमेशा सक्रिय रहे। उन्हें एक जुझारू नेता और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में जाना जाता था।
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक सफर
सतीश कुमार का राजनीतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान मेहनत और जमीनी जुड़ाव के दम पर बनाई। अपने शुरुआती दौर में उन्होंने प्रभावशाली नेता राजो सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
साल 1990 में उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के टिकट पर सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1995 में उन्होंने अस्थावां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिससे उनकी लोकप्रियता और मजबूत हो गई।
बाद के वर्षों में उन्होंने समता पार्टी के साथ भी राजनीति की और वर्ष 2001 में फिर से विधायक बनने में सफलता हासिल की। उनकी राजनीतिक सक्रियता केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2009 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर नालंदा लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, जिसमें वे दूसरे स्थान पर रहे।
जनता के मुद्दों के लिए रहे हमेशा सक्रिय
सतीश कुमार को अपने क्षेत्र में एक लोकप्रिय और जमीन से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता था। वे हमेशा किसानों, मजदूरों और समाज के कमजोर वर्गों की समस्याओं को लेकर मुखर रहते थे। यही वजह थी कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहने के बावजूद उनकी व्यक्तिगत छवि एक मजबूत जननेता की बनी रही।
उनके समर्थकों का कहना है कि सतीश कुमार हमेशा जनता के बीच रहने वाले नेता थे। चाहे सड़क, शिक्षा या सामाजिक न्याय का मुद्दा हो, वे हर मंच पर लोगों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे।
नेताओं और समर्थकों ने जताया शोक
सतीश कुमार के निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। अस्थावां के विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सतीश कुमार उनके लिए एक अभिभावक के समान थे। उन्होंने कहा कि उनके जाने से समाज और राजनीति दोनों को बड़ी क्षति हुई है।
इसके अलावा कई अन्य नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में जो कार्य किए, उन्हें लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
उनके निधन से बिहार की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।


