पूर्णिया भाजपा जिलाध्यक्ष विवाद: महिला नेत्री के साथ अभद्रता के बाद पद से हटाए गए मनोज सिंह, पार्टी ने भेजा सख्त संदेश

होली मिलन समारोह का वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद, प्रदेश नेतृत्व ने कार्रवाई करते हुए संजीव सिंह को सौंपी नई जिम्मेदारी

पटना/पूर्णिया: बिहार भाजपा में पूर्णिया जिलाध्यक्ष से जुड़ा विवाद तूल पकड़ने के बाद पार्टी नेतृत्व ने सख्त कदम उठाया है। महिला नेत्री के साथ अभद्र व्यवहार और होली मिलन समारोह के दौरान वायरल हुए वीडियो के बाद प्रदेश नेतृत्व ने जिलाध्यक्ष मनोज सिंह को पद से हटा दिया है। उनकी जगह जिला महामंत्री संजीव सिंह को तत्काल प्रभाव से पूर्णिया भाजपा का कार्यकारी जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में इस कार्रवाई की पुष्टि की गई है। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशानुसार यह निर्णय लिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन में अनुशासनहीनता या महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

दरअसल, होली से एक दिन पहले भाजपा कार्यालय में आयोजित होली मिलन समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वीडियो में कुछ नेता अश्लील गानों पर नाचते और जश्न मनाते नजर आ रहे थे। विवाद इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि यह कार्यक्रम भाजपा कार्यालय के भीतर हो रहा था और ठीक पीछे पार्टी के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर लगी हुई थी।

वीडियो के सामने आने के बाद पार्टी की छवि को लेकर सवाल उठने लगे। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी इस व्यवहार को अनुचित बताया।

महिला नेत्री के साथ अभद्रता का आरोप

विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह दृश्य बताया जा रहा है जिसमें एक महिला नेत्री फोटो खिंचवाने के लिए मंच के पास आती हैं। इसी दौरान जिलाध्यक्ष मनोज सिंह कथित तौर पर उन्हें जबरन पकड़कर अपने पास खींच लेते हैं और जबरदस्ती अबीर-गुलाल लगाने की कोशिश करते हैं। वीडियो में महिला नेत्री खुद को छुड़ाकर दूर हटने की कोशिश करती नजर आती हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई नेताओं ने इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया और कार्रवाई की मांग की।

पार्टी ने दिखाया सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने तुरंत संज्ञान लिया और जिलाध्यक्ष मनोज सिंह को पद से मुक्त कर दिया। साथ ही संगठन में अनुशासन बनाए रखने और संदेश देने के लिए जिला महामंत्री संजीव सिंह को कार्यकारी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि भाजपा में महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और किसी भी पदाधिकारी को अनुशासन से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद

राजनीतिक दलों में महिलाओं के सम्मान से जुड़े विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। बिहार भाजपा में भी पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले चर्चा में रहे हैं, जब नेताओं पर महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने या अभद्र व्यवहार के आरोप लगे।

करीब पांच साल पहले शेखपुरा में भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष पर भी एक महिला नेत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। उस मामले में ऑडियो वायरल होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिलाध्यक्ष को पद से हटा दिया था।

इसी तरह सीतामढ़ी में भी पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक महिला नेत्री के चरित्र को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं। मामला बढ़ने पर संबंधित नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी और पार्टी स्तर पर भी कार्रवाई की गई थी।

नेतृत्व ने दिया स्पष्ट संदेश

पूर्णिया मामले में कार्रवाई के बाद भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि संगठन में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता या महिला सम्मान से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। पार्टी का कहना है कि संगठन की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा को बनाए रखना हर पदाधिकारी की जिम्मेदारी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए संगठनात्मक स्तर पर आचार संहिता को और सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि किसी भी तरह की विवादित स्थिति पैदा न हो।

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