भागलपुर में अब खराब चापाकल की खैर नहीं! सड़कों पर उतरा ‘मरम्मती दस्ता’; एक कॉल पर घर आएगा मिस्त्री, DM ने शुरू किया ‘मिशन वाटर’

भागलपुर | 10 मार्च, 2026 : सूरज के तल्ख तेवर और तपती गर्मी की आहट के बीच भागलपुर जिला प्रशासन ने प्यासे कंठों को राहत देने के लिए ‘युद्धस्तर’ पर तैयारी शुरू कर दी है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए लोक स्वास्थ्य अभियंचण विभाग (PHED) की एक बड़ी पहल को धरातल पर उतारा गया है। मंगलवार को जिला समाहारणालय परिसर से जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने ‘चलंत चापाकल मरम्मती दल’ के विशेष वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

​अब जिले के किसी भी कोने में अगर चापाकल खराब होता है, तो प्रशासन की यह ‘मोबाइल वर्कशॉप’ सीधे आपके टोले-मुहल्ले तक पहुँचेगी।

16 प्रखंडों के लिए ‘चलता-फिरता अस्पताल’

​जिलाधिकारी ने साफ़ कर दिया है कि पेयजल के मामले में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह मरम्मती दल केवल एक गाड़ी नहीं, बल्कि चापाकलों के लिए एक मुकम्मल ‘अस्पताल’ की तरह काम करेगा।

  • कवरेज: जिले के सभी 16 प्रखंडों और नगर निगम क्षेत्र के लिए अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं।
  • पूरी तैयारी: हर वाहन में चापाकल ठीक करने के लिए जरूरी वाशर, पाइप, सिलेंडर, रॉड और अन्य स्पेयर पार्ट्स का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है।
  • एक्सपर्ट टीम: गाड़ियों में केवल औजार नहीं, बल्कि प्रशिक्षित मैकेनिकों की एक अनुभवी टीम है, जो मौके पर ही चापाकल की ‘सर्जरी’ कर उसे चालू करेगी।

टोल-फ्री नंबर: शिकायत दर्ज करें, समाधान घर आएगा

​अक्सर ग्रामीण इलाकों में शिकायत रहती है कि चापाकल हफ्तों से खराब पड़ा है और सरकारी मिस्त्री का पता नहीं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ‘कंट्रोल रूम’ को एक्टिव कर दिया गया है।

DM का संदेश: “हमने एक टोल-फ्री नंबर जारी किया है। जैसे ही किसी क्षेत्र से चापाकल खराब होने की सूचना मिलेगी, यह मरम्मती दल जीपीएस लोकेशन के आधार पर तुरंत मौके पर पहुँचेगा। हमारा लक्ष्य है कि गर्मी के चरम पर पहुँचने से पहले हर चापाकल को ‘वर्किंग कंडीशन’ में ला दिया जाए।”

 

VOB ग्राउंड रिपोर्ट: उम्मीद और चुनौती

​भागलपुर समाहारणालय से रवाना हुए ये वाहन बड़ी उम्मीद जगाते हैं। लेकिन असली चुनौती उन सुदूर पंचायतों और दियारा क्षेत्रों की है, जहाँ गर्मी बढ़ते ही जलस्तर (Water Level) काफी नीचे चला जाता है।

VOB का नज़रिया: प्रशासन की यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसकी सफलता दो बातों पर निर्भर करेगी— पहला, टोल-फ्री नंबर पर आने वाली कॉल्स का रिस्पांस टाइम क्या होगा? और दूसरा, क्या संकरी गलियों और सुदूर गांवों तक ये वाहन समय पर पहुँच पाएंगे? भागलपुर की जनता को उम्मीद है कि ये ‘चापाकल डॉक्टर’ केवल शहर के चक्कर नहीं काटेंगे, बल्कि उन प्यासे कंठों तक राहत पहुँचाएंगे जो हर साल बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करते हैं।

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