गुरुग्राम/पटना | 10 मार्च, 2026:हरियाणा के गुरुग्राम से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। सिधरावली इलाके में सोमवार की रात एक निर्माणाधीन साइट पर बेसमेंट की खुदाई के दौरान मिट्टी का बड़ा हिस्सा ढह जाने से सात मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। मलबे के नीचे दबने से चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े बिल्डरों की साइट पर सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है।
आधी रात का तांडव: कैसे हुआ हादसा?
घटना सोमवार रात की है, जब सिग्नेचर ग्लोबल (Signature Global) बिल्डर की एक बड़ी परियोजना में बेसमेंट के लिए गहरी खुदाई का काम चल रहा था।
- अचानक मौत: रात के अंधेरे में जब मजदूर खुदाई में जुटे थे, तभी बिना किसी चेतावनी के ऊपर से भारी मिट्टी का हिस्सा उन पर गिर गया।
- बचाव कार्य: सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत दल (SDRF) मौके पर पहुँचे। मशीनों के जरिए मलबा हटाया गया, लेकिन तब तक सात जिंदगियां दम तोड़ चुकी थीं।
पीड़ितों का प्रोफाइल: रोजी-रोटी की तलाश में गए थे परदेश
हादसे का शिकार हुए मजदूर और घायल मूल रूप से उत्तर प्रदेश (UP) और नेपाल के रहने वाले थे। बिहार और यूपी के सीमावर्ती इलाकों के मजदूर अक्सर बेहतर मजदूरी की तलाश में गुरुग्राम के इन ‘डेथ ट्रैप’ (मौत के कुएं) जैसे बेसमेंट में काम करने को मजबूर होते हैं।
हादसे का रिपोर्ट कार्ड:
| विवरण | संख्या/जानकारी |
| :— | :— |
| मृतकों की संख्या | 07 |
| घायलों की संख्या | 04 |
| बिल्डर का नाम | सिग्नेचर ग्लोबल |
| मजदूरों का मूल स्थान | उत्तर प्रदेश और नेपाल |
| प्रशासनिक कार्रवाई | जांच के आदेश, FIR की तैयारी |
लापरवाही का आरोप: बिल्डर की ‘चुप्पी’ और प्रशासन का ‘हंटर’
शुरुआती जांच में प्रशासनिक अधिकारियों ने बिल्डर पर सुरक्षा मानकों (Safety Standards) की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।
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- खतरनाक खुदाई: गहरी खुदाई के दौरान मिट्टी को रोकने के लिए ‘शॉरिंग’ या दीवार का सहारा नहीं लिया गया था।
- परिजनों को आश्वासन: स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
VOB का नजरिया: ऊंची इमारतों की बुनियाद में दबती गरीबों की जान!
गुरुग्राम की गगनचुंबी इमारतों की चमक के पीछे ऐसे काले बेसमेंट छिपे हैं, जहाँ मजदूरों की सुरक्षा ‘भगवान भरोसे’ होती है। सिग्नेचर ग्लोबल जैसे बड़े नाम जब सुरक्षा में चूक करते हैं, तो सवाल केवल लापरवाही का नहीं बल्कि ‘कॉर्पोरेट लालच’ का भी उठता है। क्या इन 7 मजदूरों की जान की कीमत केवल मुआवजे से चुकाई जा सकती है? प्रशासन को चाहिए कि वह केवल जांच के आदेश न दे, बल्कि ऐसे बिल्डरों पर ‘गैर-इरादतन हत्या’ का मामला दर्ज कर एक नजीर पेश करे।


