रसोई गैस पर ‘संकट’ के बादल! अब 25 दिन से पहले नहीं बुक होगा दूसरा सिलेंडर

पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर अब आपकी रसोई तक पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की कीमतों में आए उछाल को देखते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का मुख्य फोकस अब ‘मसाले’ (कमर्शियल) से ज्यादा ‘रोटी’ (घरेलू रसोई) को सुरक्षित करना है।

नया नियम: बुकिंग के लिए करना होगा लंबा इंतजार

​सरकार ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग की अवधि में बड़ा बदलाव किया है। अब उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरे की बुकिंग के लिए 25 दिनों का इंतजार करना होगा।

बुकिंग नियमों में बदलाव: एक नजर में

| श्रेणी | पुराना नियम | नया नियम (10 मार्च 2026 से प्रभावी) |

| :— | :— | :— |

| बुकिंग अंतराल (Gap) | 15 दिन | 25 दिन |

| सालाना औसत खपत | 7 सिलेंडर | कोई बदलाव नहीं |

| तर्क | – | औसतन एक सिलेंडर 50 दिन चलता है, अतः 25 दिन पर्याप्त हैं। |

होटल और उद्योगों पर गिरेगी गाज: कमर्शियल सप्लाई में कटौती

​तेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए कमर्शियल एलपीजी की बलि दी जा सकती है।

  • सप्लाई में कमी: होटलों और उद्योगों को दी जाने वाली कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में तत्काल प्रभाव से कटौती की गई है।
  • पूर्ण प्रतिबंध की चेतावनी: यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पूरी तरह बंद की जा सकती है ताकि घरों के चूल्हे जलते रहें।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का पेच: पीएनजी पर दबाव

​सरकार ने घरेलू पीएनजी (PNG) उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया है कि उन्हें फिलहाल कोई दिक्कत नहीं आएगी। हालांकि, एक बड़ी चुनौती सामने है:

  • रूट ब्लॉक होने का डर: भारत की अधिकांश गैस सप्लाई ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरती है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो एलएनजी (LNG) की उपलब्धता पर भारी दबाव पड़ सकता है।
  • प्राथमिकता तय: सरकार ने कुछ उद्योगों को केवल ‘उपलब्धता’ के आधार पर गैस देने का निर्णय लिया है, जबकि पीएनजी के घरेलू कनेक्शन को प्राथमिकता की श्रेणी में रखा है।

राहत की खबर: पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल ‘स्थिर’

​बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, आम आदमी की जेब पर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं डाला जाएगा।

    • कीमतों का गणित: मंत्रालय के अनुसार, जब तक कच्चा तेल 120-125 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहता है, तेल कंपनियां कीमतों में इजाफा नहीं करेंगी।
    • फिलहाल सुरक्षित: अभी कीमतें उस ‘रेड जोन’ में नहीं पहुँची हैं जहाँ आम जनता के लिए रेट बढ़ाना अनिवार्य हो जाए।

VOB का नजरिया: क्या 25 दिन का नियम बिहार के लिए काफी है?

बिहार जैसे राज्य में, जहाँ बड़े परिवारों के कारण गैस की खपत अधिक है, 25 दिन का बुकिंग गैप कुछ लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। हालांकि, सरकार का डेटा कहता है कि एक सिलेंडर 50 दिन चलता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ‘जॉइंट फैमिली’ के चलते यह औसत कम हो जाता है। कमर्शियल गैस में कटौती से होटलों और रेस्टोरेंट के खाने के दाम बढ़ सकते हैं। पश्चिम एशिया का तनाव केवल गैस ही नहीं, बल्कि हमारी पूरी अर्थव्यवस्था की लय बिगाड़ सकता है।

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