‘सात निश्चय-3’ का असर! DM ने सुनी 30 फरियादें; पेंशन से लेकर जमीन विवाद तक, भागलपुर में अब ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’

भागलपुर | 09 मार्च, 2026: बिहार के विकास को नई ऊंचाई देने के संकल्प ‘7 निश्चय-3’ के तहत भागलपुर जिला प्रशासन अब ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सोमवार को भागलपुर समाहारणालय में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने “सबका सम्मान- जीवन आसान” पहल के अंतर्गत जनता दरबार लगाकर आम जनों की समस्याओं की सीधी सुनवाई की।

फाइलें नहीं, अब सीधे समाधान की बात

​जिलाधिकारी के कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित इस जन-सुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी समस्याओं को रखा। जिलाधिकारी ने न केवल आवेदनों को स्वीकार किया, बल्कि मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित निष्पादन के निर्देश दिए।

सुनवाई के मुख्य बिंदु:

  • कुल मामले: लगभग 30 आवेदनों पर गहन सुनवाई हुई।
  • प्रमुख मुद्दे: सबसे अधिक मामले लंबित पेंशन, भूमि विवाद, भू-अर्जन और दाखिल-खारिज (Mutation) से संबंधित थे।
  • प्रशासनिक मौजूदगी: सुनवाई के दौरान वरीय उप समाहर्ता सुश्री अंकिता चौधरी भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने मामलों के दस्तावेजीकरण और फॉलो-अप की जिम्मेदारी संभाली।

‘सबका सम्मान- जीवन आसान’: क्या है यह पहल?

​यह पहल मुख्यमंत्री के ‘7 निश्चय भाग-3’ का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को इतना सुलभ बनाना है कि आम नागरिक का जीवन आसान हो सके। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को सम्मान के साथ न्याय दिलाना है। लंबित पेंशन के मामलों में उन्होंने विभाग को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर करने का आदेश दिया।

भूमि विवादों पर ‘जीरो टॉलरेंस’

​सुनवाई के दौरान एक बार फिर भूमि विवाद और दाखिल-खारिज के मामलों की अधिकता देखी गई। जिलाधिकारी ने राजस्व अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे दाखिल-खारिज की फाइलों को बेवजह न लटकाएं। भू-अर्जन से संबंधित शिकायतों पर उन्होंने निष्पक्ष जांच और मुआवजा प्रक्रिया में तेजी लाने का भरोसा दिलाया।

VOB का नजरिया: जब ‘कलेक्टर’ बने ‘कन्फेशन बॉक्स’!

अक्सर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते आम आदमी थक जाता है, लेकिन जब जिले का मुखिया खुद सामने बैठकर फाइलें पलटे, तो उम्मीद की किरण जागती है। “सबका सम्मान- जीवन आसान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जवाबदेही का एक नया मॉडल है। हालांकि, असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डीएम के आदेश के बाद निचले स्तर के ‘बाबू’ कितनी तेजी से फाइलों को आगे बढ़ाते हैं। भागलपुर में 30 परिवारों के लिए आज का दिन राहत भरा रहा, लेकिन हजारों अन्य अब भी कतार में हैं।

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