भागलपुर | 09 मार्च, 2026:अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के गौरवमयी अवसर पर भागलपुर नगर निगम ने शहरवासियों के लिए सुविधाओं का पिटारा खोल दिया है। सोमवार को भागलपुर की माननीया महापौर डॉ. वसुंधरा लाल और उप-महापौर डॉ. मो. सलाहुद्दीन अहसन ने संयुक्त रूप से शहर के विकास और जन-कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लोकार्पण किया। इस दौरान जहां एक ओर राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए आधुनिक ‘प्याऊ’ का उद्घाटन हुआ, वहीं दूसरी ओर स्लम बस्तियों में सेवा की मिसाल पेश की गई।
₹14.65 लाख से बुझेगी राहगीरों की प्यास
नगर के वार्ड संख्या 21 के तहत शंकर टॉकीज घाट किनारे और गोनर लाल लेन (हरिजन टोला) में नवनिर्मित ‘प्याऊ’ अब आम जनता की सेवा के लिए उपलब्ध है।
- विकास योजना: इन प्याऊ का निर्माण ‘पंचम राज्य वित्त आयोग’ योजना के अंतर्गत किया गया है।
- लागत: इस परियोजना पर लगभग ₹14,65,000 की राशि खर्च की गई है, जिसका उद्देश्य भीषण गर्मी के मौसम से पहले राहगीरों को स्वच्छ और शीतल पेयजल की सुविधा देना है।
- उद्घाटन: महापौर और उप-महापौर ने फीता काटकर इसे जनता को समर्पित किया। इस मौके पर वार्ड पार्षद श्री संजय कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे।
स्लम क्षेत्र में ‘ममता’ की छांव: वस्त्र वितरण
उद्घाटन कार्यक्रम के बाद मेयर और डिप्टी मेयर सीधे स्लम क्षेत्रों की ओर मुड़े। महिला दिवस के उपलक्ष्य में उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं के साथ खुशियां बांटीं।
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- जरूरतमंदों को सहारा: स्लम क्षेत्रों में महापौर ने स्वयं अपने हाथों से जरूरतमंद महिलाओं के बीच वस्त्र वितरण किया।
- सशक्तिकरण का संदेश: डॉ. वसुंधरा लाल ने कहा कि “महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज की असली प्रगति का पैमाना है। जब तक समाज की हर महिला सशक्त और आत्मनिर्भर नहीं होगी, विकास के मायने अधूरे हैं।”
- प्रतिबद्धता: उप-महापौर डॉ. सलाहुद्दीन अहसन ने भी वार्ड के सर्वांगीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को हर तबके तक पहुँचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
VOB का नजरिया: विकास और संवेदना का संगम
अक्सर नगर निगम के कार्यों को केवल फाइलों और सड़कों तक सीमित माना जाता है, लेकिन भागलपुर नगर निगम का यह प्रयास सराहनीय है। ₹14.65 लाख की लागत से बने प्याऊ न केवल प्यास बुझाएंगे, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार का संकेत भी हैं। वहीं, महिला दिवस पर ‘सिंबल’ (प्रतीक) से आगे बढ़कर स्लम की महिलाओं के बीच जाकर उनकी मदद करना यह दर्शाता है कि प्रशासन के पास एक संवेदनशील हृदय भी है।


