भागलपुर | 09 मार्च, 2026:भागलपुर नगर निगम (BMC) की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोपों के बीच वार्ड संख्या 13 के पार्षद रंजीत मंडल ने नगर निगम परिसर में ही मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मेयर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
मेयर की ‘मनमानी’ और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग
पार्षद रंजीत मंडल का आरोप है कि नगर निगम में लोकतांत्रिक मूल्यों और नियमों को ताक पर रखकर फैसले लिए जा रहे हैं। धरने पर बैठे पार्षद ने मेयर पर कई ऐसे आरोप लगाए हैं जो सीधे तौर पर निगम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करते हैं:
- अधिकारों का हनन: निर्वाचित पार्षदों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और वार्ड के विकास कार्यों में उनकी राय को नजरअंदाज किया जा रहा है।
- पारदर्शिता का अभाव: नगर निगम के विकास कार्यों और ठेकों (Tenders) के आवंटन में भारी अनियमितता का आरोप लगाया गया है।
- असामाजिक तत्वों का दखल: रंजीत मंडल ने दावा किया कि निगम के ठेकों में असामाजिक तत्वों को तरजीह दी जा रही है, जिससे न केवल काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि भ्रष्टाचार को भी सीधा बढ़ावा मिल रहा है।
“जब तक न्याय नहीं, तब तक अन्न नहीं”
नगर निगम परिसर में धरने पर बैठे रंजीत मंडल का संकल्प काफी सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई केवल उनकी नहीं, बल्कि भागलपुर की जनता के हक की है।
”नगर निगम में नियमों को दरकिनार कर चहेतों को फायदा पहुँचाया जा रहा है। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि विकास की जगह केवल बंदरबाँट हो रही है। जब तक इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं होती और पार्षदों को सम्मान वापस नहीं मिलता, मेरी यह भूख हड़ताल जारी रहेगी।” — रंजीत मंडल, पार्षद (वार्ड 13)
निगम प्रशासन में मची खलबली
पार्षद के अचानक भूख हड़ताल पर बैठने से नगर निगम के अधिकारी और अन्य पार्षद भी असहज महसूस कर रहे हैं। मेयर की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तारपूर्वक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। रंजीत मंडल की मुख्य मांग है कि नगर निगम प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए।
VOB का नजरिया: क्या ‘विकास’ की जगह ‘विवाद’ ले रहा है?
भागलपुर स्मार्ट सिटी बनने की राह पर है, लेकिन नगर निगम के भीतर चल रही यह खींचतान शहर के विकास पहिए को रोक सकती है। पार्षदों और मेयर के बीच संवाद की कमी अक्सर ऐसी स्थितियों को जन्म देती है। अगर ‘असामाजिक तत्वों’ को ठेके देने के आरोप में सच्चाई है, तो यह प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन इस भूख हड़ताल को खत्म कराने के लिए क्या ठोस आश्वासन देता है।


