भागलपुर के ‘पारस कुंज’ हैं आधुनिक जयशंकर प्रसाद! ‘भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएँ’ का भव्य लोकार्पण; साहित्यकारों का उमड़ा हुजूम

भागलपुर: रेशम नगरी की साहित्यिक फिजां रविवार को लघुकथाओं की खुशबू से सराबोर हो उठी। बरारी स्थित ‘बाबा श्री छोटेलाल दास जी आश्रम’ में देश के चर्चित लघुकथा संग्रह ‘भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएँ’ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने लघुकथा के इतिहास से लेकर वर्तमान आंदोलन तक पर सारगर्भित चर्चा की। कार्यक्रम की सबसे बड़ी गूँज सुप्रसिद्ध समालोचक डॉ. लखनलाल सिंह ‘आरोही’ का वह कथन रहा, जिसमें उन्होंने संपादक पारस कुंज की तुलना हिंदी साहित्य के दिग्गज जयशंकर प्रसाद से कर दी।

“लघुकथा भारतीय मिट्टी की उपज”: डॉ. आरोही

​बिहार अंगिका अकादमी के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. लखनलाल सिंह ‘आरोही’ ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए लघुकथा की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला।

  • प्राचीन जड़ें: उन्होंने बताया कि लघुकथा कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इसकी चर्चा ‘अग्नि पुराण’ में ‘लघुकथानिका’ के रूप में मिलती है।
  • हिंदी की पहली लघुकथा: डॉ. आरोही के अनुसार, मराठी लघुकथाकार माधव राव सप्रे ने हिंदी को पहली लघुकथा ‘टोकरी भर मिट्टी’ दी।
  • आंदोलन के प्रणेता: उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में पारस कुंज ने भागलपुर से लघुकथा की जो अलख जगाई थी, आज यह संग्रह उसी का साकार रूप है। पारस कुंज जी भागलपुर साहित्य जगत के जयशंकर प्रसाद हैं।

100 लेखकों की 113 कालजयी रचनाएं

​’शब्दयात्रा भागलपुर’ के तत्वावधान में और लायंस पब्लिकेशन ग्वालियर द्वारा प्रकाशित इस संग्रह की अपनी कई विशेषताएं हैं:

  • विशाल फलक: इस पुस्तक में देश-विदेश के 100 स्थापित और उभरते हुए लेखकों की कुल 113 लघुकथाओं को शामिल किया गया है।
  • कुशल संपादन: वरिष्ठ लघुकथाकार और हाल ही में ‘आनंद शंकर माधवन साहित्य रत्न’ से सम्मानित श्री पारस कुंज ने इसका संपादन बड़ी बारीकी से किया है।
  • अध्यक्षता: कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध आध्यात्मिक साहित्यकार श्री छोटेलाल दास जी ने की।

साहित्यकारों का महाकुंभ और लघुकथा पाठ

​लोकार्पण समारोह के दौरान लघुकथा पाठ और समीक्षा का दौर चला, जिसमें शहर के दिग्गज साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

  • विशिष्ट अतिथि: सपना चंद्रा (देश की सर्वाधिक प्रकाशित लघुकथाकारा), अंजनी कुमार शर्मा और उषा राही ने पुस्तक की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
  • पाठ करने वाले प्रमुख नाम: डॉ. विभु रंजन, महेंद्र प्रसाद निशाकर, डॉ. कुमार गौरव, रीता मिश्रा तिवारी, माधवी चौधरी, शितांशु अरुण, शिवाक्षी कौशिक और अन्य।
  • बेहतरीन संचालन: वरिष्ठ लघुकथाकार सुनील कुमार मिश्र के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन तेजतर्रार शिवाक्षी कौशिक और सिन्हा वीरेंद्र ने किया।

त्वरित अवलोकन (Quick Facts)

  • लोकार्पण तिथि: 08 मार्च, 2026 (रविवार)।
  • स्थान: बाबा श्री छोटेलाल दास जी आश्रम, बरारी, भागलपुर।
  • पुस्तक का नाम: भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएँ।
  • संपादक: श्री पारस कुंज।
  • मुख्य वक्ता: प्रो. (डॉ) लखनलाल सिंह ‘आरोही’।
  • प्रकाशन: लायंस पब्लिकेशन, ग्वालियर (मप्र)।

VOB का नजरिया: छोटी कथा, बड़ी बात!

​आज के भागदौड़ भरे युग में जहाँ लंबी रचनाएं पढ़ने का समय कम होता जा रहा है, वहां ‘लघुकथा’ समाज के लिए आईने का काम कर रही है। भागलपुर से शुरू हुआ यह लघुकथा आंदोलन अब राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बना चुका है। पारस कुंज जैसे समर्पित साहित्यकारों की मेहनत का ही नतीजा है कि 100 लेखकों की आवाज़ एक मंच पर आ सकी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस गौरवमयी उपलब्धि के लिए पूरी टीम को बधाई देता है।

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