पटना: बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर (सहायक प्राध्यापक) बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। अब केवल हाई एकेडमिक स्कोर (API) के भरोसे नौकरी नहीं मिलेगी। राजभवन ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधारने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए लिखित परीक्षा के आधार पर बहाली का फैसला किया है। नई नियमावली का मसौदा तैयार हो चुका है और अब गेंद विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (VCs) के पाले में है।
200 अंकों का नया ‘सिलेक्शन फॉर्मूला’
प्रस्तावित नियमावली के अनुसार, अब चयन प्रक्रिया पूरी तरह से बदल जाएगी। पहले जहाँ केवल इंटरव्यू और एकेडमिक रिकॉर्ड देखा जाता था, अब अभ्यर्थियों को अपनी विषय विशेषज्ञता साबित करनी होगी।
- कुल अंक: 200 अंकों के आधार पर मेरिट बनेगी।
- लिखित परीक्षा (160 अंक): यह परीक्षा ‘वर्णनात्मक’ (Descriptive) प्रकृति की होगी। यानी अभ्यर्थियों को उत्तर विस्तार से लिखने होंगे, जिससे उनके गहन विषय ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता (Analytical Ability) की जांच हो सके।
- साक्षात्कार (40 अंक): लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को 40 अंकों के इंटरव्यू से गुजरना होगा।
नेट, जेआरएफ और पीएचडी धारकों के लिए ‘बड़ा झटका’?
नई नियमावली में सबसे चौंकाने वाला प्रावधान यह है कि अब अनुभव या अतिरिक्त डिग्रियों के लिए अलग से कोई वेटेज (अंक) नहीं दिया जाएगा।
- समान अवसर: मसौदे के अनुसार, नेट (NET), जेआरएफ (JRF) या पीएचडी (PhD) के लिए अलग से अंक देने का प्रावधान हटा दिया गया है।
- अनुभव का शून्य अंक: पढ़ाने के अनुभव (Teaching Experience) के लिए भी कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिलेगा। इसका सीधा मतलब है कि अब एक फ्रेश पीएचडी होल्डर और सालों से पढ़ा रहे एडहॉक टीचर, दोनों परीक्षा के मैदान में एक ही पायदान पर खड़े होंगे।
आयु सीमा और चयन प्रक्रिया की मुख्य बातें
- न्यूनतम आयु: 23 वर्ष।
- अधिकतम आयु: 45 वर्ष।
- नोडल एजेंसी: यह पूरी बहाली प्रक्रिया ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग’ (BSUSC) के माध्यम से संपन्न कराई जाएगी।
- कुलपतियों को 10 दिन का समय: राजभवन ने राज्य के सभी कुलपतियों को यह ड्राफ्ट भेजकर 10 दिनों के अंदर उनके सुझाव और हस्ताक्षर मांगे हैं। सहमति मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
त्वरित अवलोकन (Quick Facts)
- बदलाव: अब केवल मेरिट नहीं, परीक्षा अनिवार्य।
- परीक्षा का स्वरूप: लिखित और वर्णनात्मक (Subjective)।
- कुल वेटेज: 80% लिखित परीक्षा और 20% इंटरव्यू।
- उद्देश्य: बहाली में पारदर्शिता लाना और भाई-भतीजावाद पर लगाम लगाना।
VOB का नजरिया: क्या यह बिहार की उच्च शिक्षा के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ है?
असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली में अक्सर ‘पैरवी’ और ‘API स्कोर’ के खेल की शिकायतें आती रहती थीं। लिखित परीक्षा शुरू होने से उन मेधावी छात्रों को मौका मिलेगा जो इंटरव्यू में पिछड़ जाते थे। हालांकि, पीएचडी और नेट के अंकों को खत्म करना उन अनुभवी शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो सालों से कॉलेजों में सेवा दे रहे हैं। राजभवन का यह कदम ‘मेरिट’ को सर्वोपरि रखने की दिशा में एक साहसी प्रयास है।


