अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बिहार म्यूजियम में संगोष्ठी और सांस्कृतिक संध्या, कला जगत में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा

पटना, 8 मार्च: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बिहार म्यूजियम में कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कला, संस्कृति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान और उनकी भूमिका पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में कलाकारों, शिक्षाविदों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और कला प्रेमियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के निर्माण और संरक्षण में महिलाओं ने सदियों से अहम योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही महिलाएं ज्ञान, साहित्य और कला के क्षेत्र में अग्रणी रही हैं। इतिहास में कई ऐसी विदुषी और कवयित्रियां हुईं, जिन्होंने अपने ज्ञान और रचनात्मकता से समाज को नई दिशा दी। उन्होंने यह भी कहा कि जब समाज में महिलाओं को सम्मान और अवसर मिलता है, तब विकास की गति और तेज हो जाती है।

संगोष्ठी के दौरान भारतीय संगीत और लोक परंपरा में महिलाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रसिद्ध लोकगायिका पियु मुखर्जी ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि भारतीय संगीत परंपरा में महिला पात्रों की भावनाएं, संवेदनाएं और सामाजिक अनुभव गीतों के माध्यम से गहराई से अभिव्यक्त होते हैं।

उन्होंने अपनी प्रस्तुति के दौरान कई लोकगीत और अर्धशास्त्रीय गीतों की झलक भी पेश की, जिसने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक चैता और लोकगीतों की प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों की गूंज से भर उठा और श्रोताओं ने कलाकारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी कला, संस्कृति और समाज के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं की रचनात्मकता और संवेदनशील दृष्टि ने भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में महिलाओं को और अधिक अवसर और मंच उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

इस अवसर पर कई शिक्षाविदों और कलाकारों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने और कला-संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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