“मैम प्लीज पास कर देना!” भागलपुर में एग्जाम कॉपी चेक करते समय परीक्षकों का चकराया सिर; किसी ने दी ‘कसम’ तो किसी ने सुनाई दास्तां-ए-इश्क और मजबूरी

खबर के मुख्य बिंदु:

  • इमोशनल कार्ड: “नंबर कम आए तो घर वाले आगे नहीं पढ़ने देंगे,” छात्रा की गुहार।
  • अतरंगी जवाब: लाभ समझाने के लिए ‘आम के पेड़’ का सहारा, सिनेमा के जवाब में भगत सिंह का जिक्र।
  • महाकुंभ: भागलपुर के 6 केंद्रों पर 600 से अधिक शिक्षक हर दिन खंगाल रहे हैं हजारों कॉपियां।
  • हल्का माहौल: उत्तर पुस्तिकाओं में छिपे व्यंग्य और मासूमियत ने परीक्षकों के चेहरे पर बिखेरी मुस्कान।

भागलपुर: बिहार में मैट्रिक और इंटर की परीक्षा खत्म होने के बाद अब असली ‘इम्तिहान’ उन परीक्षकों का है, जो उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। भागलपुर के मूल्यांकन केंद्रों पर इन दिनों कॉपियों से ऐसे-ऐसे उत्तर और संदेश निकल रहे हैं, जिन्हें पढ़कर अनुभवी शिक्षकों का भी सिर चकरा गया है। कहीं भविष्य को लेकर डर है, तो कहीं गजब की क्रिएटिविटी। कॉपियां केवल ज्ञान का पैमाना नहीं, बल्कि छात्रों की भावनाओं का ‘टेलीग्राम’ बन गई हैं।

केस-1: जब छात्रा ने खेला ‘इमोशनल कार्ड’

​एक छात्रा की उत्तर पुस्तिका ने एक महिला परीक्षक को भावुक कर दिया। छात्रा ने उत्तर के बजाय एक संदेश लिखा:

“मैम, मैं आगे पढ़ना चाहती हूँ, लेकिन मेरे घर वाले बहुत सख्त हैं। अगर इस बार नंबर कम आए, तो वे मेरी पढ़ाई छुड़ा देंगे। प्लीज, प्लीज, प्लीज मुझे नंबर दे दीजिएगा ताकि मैं अपना सपना पूरा कर सकूँ।”

 

​परीक्षक बताते हैं कि ऐसे संदेश पढ़कर दिल और दिमाग के बीच जंग छिड़ जाती है—एक तरफ नियम हैं, तो दूसरी तरफ एक बच्ची का भविष्य।

अतरंगी ‘लॉजिक’ और गजब का सामान्य ज्ञान

​छात्रों ने कठिन सवालों के ऐसे सरल और मजाकिया जवाब दिए हैं कि परीक्षक अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे:

  • आम का ‘लाभ’: ‘लाभ’ (Profit) पर निबंध लिखना था। एक छात्र ने किसी किताबी परिभाषा के बजाय लिखा— “मेरे पास एक आम का पेड़ है। मैंने उसके आम तोड़े और बाजार में बेच दिए। जो पैसे मिले, वही मेरा लाभ है।”
  • सिनेमा और भगत सिंह: ‘चित्रपट की लोकप्रियता’ पर सवाल था, लेकिन छात्र ने उसमें इतिहास और शहीद भगत सिंह के बलिदान को पिरो दिया।
  • कर्पूरी ठाकुर का जिक्र: ‘बातचीत’ के महत्व पर पूछे गए सवाल में एक छात्र ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के गुणों का बखान करते हुए उत्तर को एक नई दिशा दे दी।

त्वरित अवलोकन (Quick Facts)

  • मूल्यांकन केंद्र: 6 (मैट्रिक कॉपियों के लिए)
  • परीक्षकों की संख्या: 600+ प्रतिदिन
  • कार्यवाही: इंटर और मैट्रिक का मूल्यांकन अलग-अलग केंद्रों पर जारी।
  • माहौल: शिक्षा विभाग ने समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

VOB का नजरिया: कॉपियों में छिपी समाज की हकीकत

​एग्जाम की कॉपियों में लिखे ये भावुक संदेश केवल हंसी का पात्र नहीं हैं, बल्कि यह हमारे समाज की गहरी सच्चाई भी बयां करते हैं। छात्रा का यह कहना कि ‘नंबर कम आए तो पढ़ाई छूट जाएगी’, बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी बेटियों की शिक्षा के प्रति चुनौतियों को दर्शाता है। वहीं, आम और पेड़ों के उदाहरण देने वाले उत्तर बताते हैं कि किताबी ज्ञान से ज्यादा छात्रों का अनुभव बोल रहा है। सरकार को परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों की काउंसलिंग पर भी ध्यान देना चाहिए।

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