खबर के मुख्य बिंदु:
- मामूली विवाद, भयानक अंत: पड़ोसी की बकरी के ‘आटा’ खाने पर शुरू हुआ था झगड़ा।
- मदद पड़ी भारी: पत्नी को बचाने आए 55 वर्षीय सुबोध मंडल की पीट-पीटकर हत्या।
- नामजद आरोपी: रामधनी मंडल, अनीता देवी समेत 4 लोगों पर हत्या का गंभीर आरोप।
- दहशत: सन्हौला के रिवरसाइड इलाके में तनाव, पुलिस कर रही छापेमारी।
भागलपुर: इंसानियत और सहनशीलता किस कदर खत्म होती जा रही है, इसकी एक रूह कंपा देने वाली मिसाल भागलपुर के सन्हौला थाना क्षेत्र में देखने को मिली है। यहाँ महज एक बकरी के आटा खा लेने जैसे मामूली विवाद में एक बुजुर्ग को अपनी जान गंवानी पड़ी। शुक्रवार की रात हुई इस हिंसक झड़प ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया और पूरे रिवरसाइड इलाके में सनसनी फैला दी है।
बकरी, आटा और ‘खूनी’ नीयत
मृतक के पुत्र चंदन कुमार द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन के अनुसार, यह पूरी घटना 6 मार्च की रात करीब 8 बजे की है:
- विवाद की जड़: चंदन की माँ घर में खाना बना रही थीं, तभी पड़ोसी रामधनी मंडल की बकरी घर में घुस गई और वहां रखा आटा खाने लगी।
- गाली-गलौज: जब माँ ने बकरी को भगाने की कोशिश की, तो पड़ोसी रामधनी मंडल अपने परिवार के साथ वहां पहुँच गया और अभद्र गालियां देने लगा।
- जानलेवा हमला: आरोप है कि रामधनी मंडल, उसकी पत्नी अनीता देवी, गोलू मंडल और राहुल कुमार ने मिलकर चंदन की माँ के साथ मारपीट शुरू कर दी।
बीच-बचाव करने आए पिता की बेरहमी से पिटाई
चंदन ने बताया कि जब शोर सुनकर उसके पिता सुबोध मंडल बीच-बचाव करने और अपनी पत्नी को बचाने पहुंचे, तो चारों आरोपियों ने उन पर हमला बोल दिया।
”उन्होंने मेरे पिता को इतनी बेरहमी से पीटा कि उनकी हालत मौके पर ही बिगड़ गई। हमने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।” — चंदन कुमार, मृतक का पुत्र
पुलिस की कार्रवाई: जांच में जुटी टीमें
घटना की सूचना मिलते ही सन्हौला पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लिया।
- प्राथमिकी: मृतक के पुत्र चंदन कुमार के लिखित आवेदन के आधार पर 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- तनाव: इलाके में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
VOB का नजरिया: क्या यही है हमारा समाज?
महज एक मुट्ठी आटे या एक जानवर की गलती पर किसी की जान ले लेना यह दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में छोटी-छोटी रंजिशें अब जानलेवा साबित हो रही हैं। सुबोध मंडल की मौत केवल एक हत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज की घटती सहनशक्ति का प्रमाण है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल आरोपियों को कड़ी सजा दिलाए, बल्कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ को बढ़ावा दे ताकि पड़ोसियों के बीच की कड़वाहट खून-खराबे तक न पहुँचे।


