खबर के मुख्य बिंदु:
- शानदार छलांग: पिछले साल 455वीं रैंक, इस बार सीधे देश में 16वां स्थान।
- सफलता की हैट्रिक: BPSC में 6ठी रैंक, फिर UPSC में चयन और अब टॉप-20 में जगह।
- वर्दी के साथ पढ़ाई: भारतीय रेलवे सेवा (IRS) में ट्रेनिंग के दौरान हासिल की यह बड़ी कामयाबी।
- पारिवारिक गौरव: औरंगाबाद के सत्येंद्र नगर में जश्न, पिता इंजीनियर बीके श्रीवास्तव का सीना हुआ गर्व से चौड़ा।
औरंगाबाद: बिहार की मिट्टी में प्रतिभा की कमी नहीं है, और इसे एक बार फिर साबित कर दिखाया है औरंगाबाद की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों में मोनिका ने देशभर में 16वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने जिले का मान बढ़ाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को बड़ा बनाया जा सकता है। मोनिका की इस सफलता से औरंगाबाद जिला मुख्यालय के सत्येंद्र नगर इलाके में दिवाली जैसा माहौल है।
रैंक 455 से रैंक 16 तक का ‘गोल्डन’ सफर
मोनिका की सफलता की कहानी उनके जुझारूपन को दर्शाती है। वे उन अभ्यर्थियों के लिए मिसाल हैं जो एक बार चयन होने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं।
- BPSC में डंका: वर्ष 2022 में मोनिका ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में पूरे राज्य में 6ठा स्थान प्राप्त किया था।
- पहला UPSC प्रयास: साल 2024 में उन्होंने पहली बार में ही यूपीएससी क्रैक किया और 455वीं रैंक हासिल की।
- वर्तमान स्थिति: मोनिका अभी भारतीय रेलवे सेवा के अंतर्गत अंडर ट्रेनिंग अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इसी ट्रेनिंग की व्यस्तता के बीच उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इस बार टॉप-20 में जगह बनाकर आईएएस (IAS) बनने का सपना पूरा किया।
इंजीनियर पिता और संस्कारी परिवार का साथ
मोनिका औरंगाबाद के सत्येंद्र नगर निवासी ई. बीके श्रीवास्तव एवं भारती श्रीवास्तव की सुपुत्री हैं। उनके पिता पेशे से इंजीनियर हैं, जिन्होंने हमेशा बेटी की शिक्षा और उसके बड़े सपनों को प्राथमिकता दी। परिवार के अनुसार, मोनिका बचपन से ही मेधावी थीं और प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करना उनका एकमात्र लक्ष्य था।
VOB का नजरिया: ‘संतोष’ नहीं, ‘श्रेष्ठता’ की भूख!
मोनिका श्रीवास्तव की सफलता यह सिखाती है कि यदि आपके पास पहले से एक सुरक्षित नौकरी है, तब भी आप अपनी मेहनत से उससे बेहतर मुकाम हासिल कर सकते हैं। रैंक 455 से रैंक 16 तक पहुँचना कोई मामूली बात नहीं है, यह उनके कठिन परिश्रम और खुद को और बेहतर बनाने की जिद का परिणाम है। मोनिका अब बिहार कैडर में आकर प्रदेश की सेवा करेंगी या किसी अन्य राज्य में, यह देखना होगा, लेकिन उनकी चमक पूरे देश में फैल चुकी है।


