अंधेरे को चीरकर नवादा के ‘रवि’ ने बिखेरी चमक! UPSC में हासिल की 20वीं रैंक; मां पढ़ती थी किताबें, पिता ने दिया साथ, अब बनेंगे ‘सूरज’ की तरह IAS

बर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • ऐतिहासिक सफलता: नवादा के अकबरपुर (महुली गांव) के रवि राज ने UPSC 2025 में हासिल की देशभर में 20वीं रैंक
  • मिसाल: बचपन में आंखों की रोशनी जाने के बावजूद नहीं हारी हिम्मत, बने देश के रोल मॉडल।
  • मां की तपस्या: मां खुद किताबें पढ़कर सुनाती थीं और बनाती थीं नोट्स; पिता किसान रंजन सिन्हा का मिला अटूट साथ।
  • डिजिटल गुरु: खान सर के लेक्चर्स और यूट्यूब तकनीक का सहारा लेकर घर बैठे की तैयारी।

नवादा: कहते हैं कि हौसले अगर फौलादी हों, तो किस्मत की लकीरें खुद-ब-खुद बदल जाती हैं। बिहार के नवादा जिले के एक साधारण किसान के बेटे रवि राज ने इसे हकीकत में बदल दिया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के घोषित नतीजों में रवि ने 20वीं रैंक लाकर न केवल नवादा, बल्कि पूरे बिहार का मान बढ़ाया है। नेत्रहीन होने के बावजूद रवि का ‘विजन’ इतना साफ था कि उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा को पहले ही बड़े प्रयास में फतेह कर लिया।

तपस्या की कहानी: जब मां बनीं बेटे की ‘आंखें’

​रवि की सफलता के पीछे एक ऐसी मां की कहानी है, जिसने अपनी ममता को ही मशाल बना लिया।

  • सहारा: बचपन में रोशनी जाने के बाद रवि के लिए दुनिया अंधेरी थी, लेकिन मां विभा सिन्हा ने हार नहीं मानी।
  • मेहनत: वे घंटों बैठकर रवि को किताबें पढ़कर सुनाती थीं। कठिन चैप्टर्स के नोट्स खुद तैयार करती थीं ताकि रवि सुनकर उन्हें याद कर सकें।
  • रूटीन: रवि हर दिन 8 से 10 घंटे अपनी पढ़ाई को देते थे, जहाँ उनका सबसे बड़ा सहारा ‘श्रवण शक्ति’ (Listening Power) और उनकी मां की आवाज थी।

शैक्षणिक सफर: महुली से ‘मसूरी’ (LBSNAA) की तैयारी

स्तर

संस्थान

विषय / उपलब्धि

प्रारंभिक शिक्षा

दयाल पब्लिक स्कूल

शिक्षा की नींव

इंटरमीडिएट

सत्येंद्र नारायण सिंह इंटर स्कूल

शैक्षणिक विस्तार

स्नातक (Graduation)

सीताराम साहू कॉलेज

राजनीति विज्ञान (Political Science)

BPSC

बिहार लोक सेवा आयोग

राजस्व अधिकारी (जिला टॉपर)

UPSC 2025

सिविल सेवा परीक्षा

देशभर में 20वीं रैंक (IAS)

तकनीक और ‘खान सर’ का जादू

​रवि राज ने अपनी तैयारी में तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया। उन्होंने इंटरनेट को अपना हथियार बनाया। विशेष रूप से पटना के मशहूर खान सर और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म्स के वीडियो लेक्चर्स ने उनके कॉन्सेप्ट्स को स्पष्ट करने में बड़ी भूमिका निभाई। रवि बताते हैं कि ऑडियो बुक्स और यूट्यूब ने उनके लिए ‘डिजिटल गुरु’ का काम किया।

VOB का नजरिया: ‘दृष्टि’ नहीं, ‘दृष्टिकोण’ मायने रखता है!

​रवि राज की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक सबक है जो छोटी-छोटी बाधाओं से घबराकर अपने लक्ष्य छोड़ देते हैं। प्रकृति ने भले ही उनकी आंखों की रोशनी छीन ली, लेकिन उनके संकल्प की रोशनी इतनी तेज थी कि आज वे देश के नीति-निर्धारक (IAS) बनने जा रहे हैं। नवादा का यह ‘रवि’ (सूरज) अब प्रशासनिक गलियारों में सुशासन की नई रोशनी बिखेरेगा।

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