खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- दिल दहला देने वाला हादसा: जलपाईगुड़ी के पास ट्रेन से गिरकर 30 वर्षीय विजय कुमार राय की मौत।
- सदमे से मौत: जवान बेटे को आंखों के सामने खोने का गम बर्दाश्त नहीं कर सके 60 वर्षीय पिता शंभू राय, मौके पर ही थमीं सांसें।
- प्रवासी मजदूर: डिब्रूगढ़ (असम) में मजदूरी कर घर लौट रहे थे पिता-पुत्र।
- वजह: ट्रेन के गेट पर उल्टी करने के दौरान पैर फिसलने से हुआ हादसा।
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। साहेबगंज नगर परिषद के जगदीशपुर (वार्ड 26) निवासी एक परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब घर लौट रहे पिता-पुत्र की एक साथ मौत हो गई। बेटे की ट्रेन हादसे में जान गई, तो पिता का कलेजा यह मंजर देख फट गया और उन्होंने भी वहीं दम तोड़ दिया।
मजदूरी कर लौट रहे थे घर, रास्ते में मिला ‘काल’
परिजनों के मुताबिक, शंभू राय (60) और उनका बेटा विजय कुमार राय (30) असम के डिब्रूगढ़ में रहकर मजदूरी करते थे। वे दोनों ट्रेन से अपने घर साहेबगंज लौट रहे थे।
- कैसे हुआ हादसा: ट्रेन जब पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के पास पहुंची, तब विजय को अचानक जी मिचलाने और उल्टी (Vomit) की शिकायत हुई।
- पैर फिसला और…: विजय ट्रेन के गेट पर गया था, तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह तेज रफ्तार ट्रेन से सीधे नीचे जा गिरा।
आंखों के सामने उजड़ गया संसार
हादसा पिता शंभू राय की नजरों के सामने हुआ। बीमार पिता पहले से ही कमजोर थे, और जवान बेटे को इस तरह मौत के मुंह में जाते देख वे गहरे सदमे में चले गए।
- पिता का अंत: बेटे के बिछड़ने का गम इतना गहरा था कि शंभू राय का दिल यह बोझ सह नहीं पाया और उन्होंने भी ट्रेन में ही प्राण त्याग दिए।
- गांव में कोहराम: जैसे ही यह खबर जगदीशपुर पहुंची, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। एक ही घर से दो अर्थियां उठने की खबर ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
VOB का नजरिया: सुरक्षित सफर की अनदेखी और प्रवासियों का दर्द
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन हजारों प्रवासी मजदूरों की त्रासदी है जो अपनों के लिए परदेस में हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं। ट्रेन के गेट पर खड़े होना या चलती ट्रेन से झुकना जानलेवा हो सकता है, जिसकी भारी कीमत इस परिवार ने चुकाई है। रेलवे को भी ‘डोर सेंसर’ और सुरक्षा मानकों पर और सख्ती बरतनी चाहिए ताकि किसी और का घर इस तरह न उजड़े।


