खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- अजीबोगरीब वाकया: मालदा-सिलीगुड़ी DMU के ड्राइवर ने बीच स्टेशन पर ट्रेन ले जाने से किया इंकार।
- तर्क: “9 घंटे की ड्यूटी पूरी हो गई है, थकान में ट्रेन चलाना नियमों के खिलाफ और असुरक्षित।”
- सफर में ब्रेक: होली के मौके पर ठाकुरगंज स्टेशन पर 3 घंटे तक खड़ी रही ट्रेन; यात्री बेहाल।
- विकल्प: प्लेटफॉर्म जाम होने पर यात्रियों को दूसरी ट्रेन (बालुरघाट इंटरसिटी) से भेजा गया आगे।
ठाकुरगंज: रेलवे के इतिहास में अक्सर इंजन खराब होने या सिग्नल न मिलने से ट्रेनें रुकती हैं, लेकिन किशनगंज के ठाकुरगंज स्टेशन पर बुधवार को जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। मालदा से सिलीगुड़ी जा रही DMU (ट्रेन संख्या 75719) के लोको पायलट ने बीच रास्ते में ही यह कहते हुए स्टेयरिंग छोड़ दिया कि— “मेरी ड्यूटी पूरी हो गई, अब मैं एक इंच आगे नहीं बढ़ूंगा।” इसके बाद 3 घंटे तक स्टेशन पर हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा और यात्री बेबसी में पटरियां ताकते रहे।
घड़ी की सुई रुकी और थम गए ट्रेन के पहिए
मालदा-सिलीगुड़ी DMU की कहानी बुधवार को शुरू से ही खराब रही।
- देरी का सिलसिला: ट्रेन मालदा से सुबह 6:35 बजे चली थी, लेकिन रास्ते में लेट होते-होते यह 3 घंटे की देरी से ठाकुरगंज पहुँची।
- डेडलाइन: दोपहर जब ट्रेन स्टेशन पर रुकी, तब तक चालक के काम के निर्धारित 9 घंटे पूरे हो चुके थे।
- मेमो और सरेंडर: लोको पायलट ने सुरक्षा और थकान का हवाला देते हुए स्टेशन मास्टर मनीष कुमार को मेमो थमा दिया और ट्रेन को मेन लाइन पर ही खड़ा कर दिया।
ट्रेन का शेड्यूल और ‘ड्यूटी’ का गणित
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विवरण |
समय / जानकारी |
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ट्रेन नंबर / नाम |
75719 (मालदा-सिलीगुड़ी DMU) |
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ठाकुरगंज आगमन समय |
सुबह 11:55 (निर्धारित) |
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वास्तविक आगमन |
करीब 3 घंटे की देरी से |
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प्लेटफॉर्म बाधित |
दोपहर 2:52 बजे से (प्लेटफॉर्म संख्या 1) |
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समाधान |
सिलीगुड़ी से दूसरे ड्राइवर के आने के बाद रवानगी |
होली के मौके पर यात्रियों की ‘फजीहत’
त्योहार के समय घर लौट रहे यात्रियों के लिए यह किसी बुरे सपने जैसा था।
- घंटों इंतजार: चिलचिलाती धूप और ऊपर से स्टेशन पर 3 घंटे का ठहराव।
- अनाउंसमेंट: जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो रेलवे ने घोषणा की कि यात्री बालुरघाट-सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस से अपनी आगे की यात्रा पूरी करें।
- वैकल्पिक व्यवस्था: ठाकुरगंज स्टेशन मास्टर ने बताया कि ड्राइवर की शिफ्ट खत्म होने के कारण यह स्थिति आई। सिलीगुड़ी से दूसरा ड्राइवर मंगवाया गया, जिसमें काफी वक्त लग गया।
VOB का नजरिया: नियम सही, पर ‘सिस्टम’ का क्या?
रेलवे सुरक्षा नियमों के अनुसार, एक थका हुआ ड्राइवर हजारों जिंदगियों के लिए खतरा हो सकता है। लोको पायलट का अपनी ड्यूटी के बाद गाड़ी खड़ी करना कानूनी रूप से सही है, लेकिन सवाल रेलवे प्रबंधन पर है। जब ट्रेन 3 घंटे लेट थी, तो क्या कंट्रोल रूम को पता नहीं था कि ड्राइवर की ड्यूटी खत्म होने वाली है? होली जैसे बड़े त्योहार पर यात्रियों को इस तरह ‘भगवान भरोसे’ छोड़ना रेलवे की बड़ी प्लानिंग फेलियर है।


