पटना: बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रहे अटकलों पर विराम लग गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपना पर्चा दाखिल कर दिया है, जिससे पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।
नीतीश कुमार ने अपने ट्विटर संदेश में लिखा कि पिछले दो दशकों से जनता ने उन पर जो भरोसा रखा, उसी के बल पर उन्होंने बिहार की सेवा की। उन्होंने यह भी दोहराया कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें।
इस बीच, जदयू राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उच्च सदन में नहीं भेजेगी। उपसभापति की कुर्सी खाली होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस पद पर नीतीश कुमार को बिठाया जा सकता है।
साथ ही, ‘भारत रत्न’ कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी है, जिससे जदयू के आंतरिक समीकरण बदल सकते हैं।
बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी अटकलें तेज हैं। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, जातीय संतुलन और सौम्य व्यक्तित्व को उनके पक्ष में मजबूत तर्क माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि सत्ता संतुलन की नई पटकथा है। नीतीश कुमार का दिल्ली जाना और पटना में नई कमान का गठन, बिहार की राजनीति में एक नया युग और अध्याय साबित हो सकता है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अंतिम फैसला किस दिशा में जाता है और सत्ता की बिसात पर अगली चाल क्या होगी।


