
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- भावुक विदाई: नीतीश कुमार ने बिहार की जनता के नाम लिखा इमोशनल संदेश; 2 दशक के साथ के लिए जताया आभार।
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड: चारों सदनों (विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनने की इच्छा की प्रकट।
- बड़ा संकेत: “नई सरकार को मिलेगा मेरा मार्गदर्शन”— मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर सत्ता हस्तांतरण के दिए संकेत।
- संकल्प: “विकसित बिहार बनाने का मिशन जारी रहेगा, रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।”
पटना | 05 मार्च, 2026: बिहार की सियासत में पिछले 48 घंटों से जारी सस्पेंस पर अब खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विराम लगा दिया है। एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नीतीश कुमार ने ऐलान कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राजनीति का रुख कर रहे हैं। इस पोस्ट के साथ ही बिहार में ‘नीतीश युग’ के समापन और एक नई राजनीतिक व्यवस्था के उदय पर आधिकारिक मुहर लग गई है।

“चारों सदनों का सदस्य बनना मेरी अंतिम इच्छा”
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में एक दिलचस्प व्यक्तिगत इच्छा का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनके संसदीय जीवन की यह पुरानी साध थी कि वे लोकतंत्र के चारों स्तंभों का हिस्सा बनें:
- बिहार विधानसभा (MLA)
- बिहार विधान परिषद (MLC)
- लोकसभा (MP)
- राज्यसभा (अब होने जा रहे हैं सदस्य) नीतीश ने साफ किया कि वे अपनी इसी इच्छा को पूरा करने के लिए इस बार राज्यसभा के मैदान में उतर रहे हैं।
20 साल का भरोसा और ‘नई सरकार’ का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दो दशकों के अटूट प्रेम और समर्थन के लिए बिहारवासियों का आभार व्यक्त किया। लेकिन, जिस लाइन ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह थी— “जो नई सरकार बनेगी, उसको मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन रहेगा।”
- स्पष्ट संदेश: इस लाइन ने साफ कर दिया है कि वे अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ रहे हैं।
- मार्गदर्शक की भूमिका: नीतीश अब ‘एक्टिव पॉलिटिक्स’ के बजाय ‘गार्जियन’ (अभिभावक) की भूमिका में नजर आएंगे।
रिश्ता टूटेगा नहीं, संकल्प रहेगा कायम
नीतीश कुमार ने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया है कि दिल्ली जाने का मतलब बिहार से नाता तोड़ना नहीं है। उन्होंने लिखा कि “विकसित बिहार” बनाने का उनका संकल्प वैसा ही रहेगा जैसा पिछले 20 सालों से था। उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया कि उनका और बिहार के लोगों का संबंध भविष्य में भी अटूट बना रहेगा।
VOB का नजरिया: एक युग का सम्मानजनक समापन
नीतीश कुमार का यह पोस्ट उनकी शालीन राजनीति की पहचान है। जहाँ समर्थक सड़कों पर हंगामा कर रहे हैं (जैसा कि हमने सीएम हाउस के बाहर देखा), वहीं नीतीश ने बड़े ही शांत तरीके से अपनी बात रखकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। ‘चारों सदनों’ का सदस्य बनना किसी भी राजनेता के लिए एक दुर्लभ कीर्तिमान है। यह पोस्ट केवल एक ‘त्यागपत्र’ नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता का ‘रिपोर्ट कार्ड’ है जिसने बिहार की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने का दावा किया।


