खाड़ी संकट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा, रूस ने भारत को दिया तेल आपूर्ति का भरोसा

नई दिल्ली: खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। इस बीच भारत के पुराने सहयोगी रूस ने आश्वासन दिया है कि यदि खाड़ी संकट के कारण भारत की तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो वह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध कराने को तैयार है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है।


होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत की आधी तेल आपूर्ति

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और एलपीजी खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण सप्लाई बाधित होने की आशंका है। यदि यह मार्ग प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ सकता है।


भारत के पास फिलहाल पर्याप्त भंडार

सरकार के अनुसार, देश में वर्तमान में लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों के लिए लगभग 50 दिनों का स्टॉक मौजूद है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि भारत अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वैकल्पिक आयात स्रोतों की तलाश जारी है और ईंधन आपूर्ति की निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। भारत ने होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए अन्य सप्लाई चैनल भी विकसित किए हैं।


रूस का प्रस्ताव: बदले हालात में नई ऊर्जा साझेदारी?

समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने संकेत दिया है कि वह पश्चिम एशियाई देशों से होने वाली संभावित कमी की भरपाई के लिए अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध करा सकता है।

गौरतलब है कि भारत ने पहले अमेरिका के साथ समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद में कमी का संकेत दिया था। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों और अमेरिकी टैरिफ नीतियों में बदलाव के बाद ऊर्जा समीकरण एक बार फिर बदलते दिख रहे हैं।


ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के पार

खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 10% बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में यह तेजी जारी रहती है, तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई दर पर भी पड़ सकता है।


निष्कर्ष:
खाड़ी संकट के बीच रूस का यह प्रस्ताव भारत के लिए राहत भरा संकेत है। हालांकि, वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर और तेजी से काम करने की जरूरत होगी।

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