Holi 2026: “जब दुनिया जंग की आग में जल रही हो, तो उत्सव कैसा?”— भागलपुर के डॉ. अजय सिंह नहीं खेलेंगे होली; ‘जीवन जागृति सोसाइटी’ का बड़ा ऐलान

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ा फैसला: ‘जीवन जागृति सोसाइटी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह इस बार नहीं मनाएंगे होली।
  • वजह: खाड़ी देशों और विश्व के अन्य हिस्सों में जारी युद्ध और अशांति से डॉ. सिंह आहत।
  • संस्था का स्टैंड: सोसाइटी इस बार नहीं करेगी ‘होली मिलन’ का आयोजन, न उड़ेगा गुलाल।
  • संदेश: “शांति की स्थापना ही सबसे बड़ा उत्सव”— मानवता के पक्ष में खड़ा हुआ भागलपुर का समाजसेवी संस्थान।

भागलपुर | 03 मार्च, 2026: रंगों के त्योहार होली पर जहाँ पूरा देश फागुनी मस्ती में डूबने की तैयारी कर रहा है, वहीं भागलपुर से एक ऐसी खबर आई है जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती है। प्रसिद्ध विशेषज्ञ और जीवन जागृति सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने इस वर्ष होली न मनाने का निर्णय लिया है। उनका यह फैसला किसी व्यक्तिगत शोक की वजह से नहीं, बल्कि विश्व में जारी युद्ध की विभीषिका और मानवता के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करने के लिए है।

“संकट में मानवता, आत्ममंथन का है समय”: डॉ. अजय सिंह

​डॉ. अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां, विशेषकर खाड़ी देशों में जारी संघर्ष और मिसाइलों के साये में जी रहे हजारों परिवारों की स्थिति को देखते हुए उनका मन उत्सव मनाने की अनुमति नहीं दे रहा है।

​”जब दुनिया के अनेक हिस्सों में लोग संकट और युद्ध की त्रासदी झेल रहे हैं, हज़ारों परिवार अपना घर छोड़ बंकरों में कैद हैं, तब हमें आत्ममंथन करना चाहिए। शांति की स्थापना ही सबसे बड़ा उत्सव है। जब पूरे विश्व में शांति बहाल होगी, तभी खुशियां मनाना सार्थक होगा।” — डॉ. अजय कुमार सिंह

 

जीवन जागृति सोसाइटी: न रंग उड़ेगा, न मनेगा मिलन समारोह

​डॉ. सिंह के इस संवेदनशील आह्वान का उनकी संस्था ‘जीवन जागृति सोसाइटी’ ने भी पूर्ण समर्थन किया है। संस्था ने आधिकारिक घोषणा की है कि:

  • सादगी: इस बार संस्था की ओर से किसी भी प्रकार के रंग, अबीर या गुलाल का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
  • नो इवेंट: हर साल होने वाला भव्य ‘सामूहिक होली मिलन समारोह’ इस बार स्थगित रहेगा।
  • प्रतीकात्मक समर्थन: यह कदम विश्व शांति के प्रति एक प्रतीकात्मक समर्थन के रूप में उठाया गया है।

शहर में चर्चा का विषय: मिश्रित प्रतिक्रियाएं

​डॉ. सिंह के इस फैसले के बाद भागलपुर शहर के प्रबुद्ध वर्ग और आम लोगों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है।

  1. समर्थक: कई लोग इसे एक उच्च मानवीय संवेदना का उदाहरण मान रहे हैं, जो यह याद दिलाता है कि हम एक ‘ग्लोबल विलेज’ का हिस्सा हैं।
  2. अन्य विचार: कुछ लोगों का मानना है कि त्योहार नकारात्मकता के खिलाफ लड़ने की ऊर्जा देते हैं, इसलिए इन्हें मनाना चाहिए। हालांकि, डॉ. सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे त्योहार के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में व्यक्तिगत तौर पर सादगी से रहना ही उन्हें उचित लग रहा है।

VOB का नजरिया: संवेदना की एक नई मिसाल

​भागलपुर के डॉ. अजय सिंह ने यह साबित कर दिया है कि एक सच्चा नागरिक केवल अपने घर की खुशियों के बारे में नहीं सोचता। ऐसे समय में जब भागलपुर और बिहार के सैकड़ों लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं (जैसा कि हालिया खबरों में सामने आया है), डॉ. सिंह का यह फैसला उन परिवारों के साथ एकजुटता दिखाने का एक सशक्त तरीका है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ विश्व शांति की इस अपील का सम्मान करता है।

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