नई दिल्ली: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज, 3 मार्च मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लग रहा है। यह खण्डग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। खगोलीय दृष्टि से यह एक सामान्य घटना है, लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के कारण इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है।
भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी। ग्रहण का मध्य शाम 5:05 बजे और मोक्ष काल शाम 6:48 बजे रहेगा, जबकि उपच्छाया रात 7:55 बजे समाप्त होगी। भारत में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा, यानी चंद्रमा के उदय के समय ग्रहण अपने अंतिम चरण में होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार देश में यह ग्रहण औसतन 20 से 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में चंद्रोदय जल्दी होने के कारण ग्रहण कुछ अधिक समय तक नजर आ सकता है, जबकि पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम भारत में इसकी अवधि अपेक्षाकृत कम रहेगी।
सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। 3 मार्च को सूतक काल सुबह 6:20 बजे से प्रभावी रहेगा और ग्रहण समाप्ति तक जारी रहेगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और पूजा-पाठ तथा शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। कई श्रद्धालु इस अवधि में भोजन बनाने और ग्रहण करने से भी परहेज करते हैं।
राशि और नक्षत्र पर प्रभाव
यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सिंह राशि में पहले से केतु की स्थिति होने के कारण कुछ लोगों को मानसिक तनाव या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषकर सिंह राशि के जातकों को संयम और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
किन-किन देशों में दिखेगा ग्रहण
भारत के अलावा यह चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। रूस, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित अन्य देशों में भी इस खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण लगेंगे, लेकिन भारत में केवल 3 मार्च का ग्रहण ही दृश्य होगा। 28 अगस्त 2026 को लगने वाला दूसरा चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।

