खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- सम्मान: मालदा मंडल के 22 सेवानिवृत्त रेल कर्मचारियों के लिए भव्य विदाई समारोह।
- विभाग: सिग्नल, इंजीनियरिंग, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल समेत कई विभागों के कर्मी हुए रिटायर।
- अध्यक्षता: मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुपा घोष ने स्मृति-चिन्ह देकर बढ़ाया मान।
- संस्कृति: भारतीय रेल की सेवा में दशकों गुजारने वाले ‘रेल योद्धाओं’ को दी गई भावभीनी विदाई।
मालदा: भारतीय रेलवे की पटरियों पर दशकों तक सुरक्षा और सेवा की इबारत लिखने वाले कर्मचारियों के लिए सोमवार का दिन बेहद भावुक रहा। पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने फरवरी 2026 में सेवानिवृत्त हुए अपने जांबाज साथियों के सम्मान में डीआरएम कार्यालय स्थित ‘मंदर सभा कक्ष’ में एक गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया। यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन हाथों के प्रति कृतज्ञता थी जिन्होंने दिन-रात एक कर देश की इस जीवनरेखा को थामे रखा।
22 ‘रेल योद्धाओं’ की नई पारी की शुरुआत
मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में कुल 22 कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। ये कर्मचारी रेलवे के विभिन्न महत्वपूर्ण स्तंभों से जुड़े थे:
- सिग्नल एवं दूरसंचार (S&T)
- इंजीनियरिंग और यांत्रिक (Mechanical)
- परिचालन (Operations) और विद्युत (Electrical)
- अन्य संबद्ध विभाग
इन सभी ने भारतीय रेल में अपनी दीर्घकालिक, समर्पित और निष्ठावान सेवा पूरी की है। अब वे अपने जीवन की एक नई और सुकून भरी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।
स्मृति-चिन्ह और सेवा अभिलेख: समर्पण का प्रतीक
कार्यक्रम की अध्यक्षता मालदा मंडल रेलवे अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अनुपा घोष ने की। उन्होंने एक-एक कर सभी सेवानिवृत्त कर्मियों को स्मृति-चिन्ह और उनके सेवा अभिलेख (Service Records) सौंपे।
”यह केवल कागज का टुकड़ा या स्मृति-चिन्ह नहीं है, बल्कि संगठन के प्रति आपके उस अमूल्य योगदान का सम्मान है जिसे रेलवे कभी नहीं भूल सकता।” — डॉ. अनुपा घोष
टीम वर्क से सफल हुआ आयोजन
समारोह को सफल बनाने में मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने आपसी तालमेल का परिचय दिया। वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी (Sr. DPO) श्री इंद्रजीत के पर्यवेक्षण में कार्मिक विभाग ने इस पूरे कार्यक्रम का समन्वय किया, जिसमें वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक (Sr. DFM) श्री प्रवीण कुमार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में स्टाफ सदस्य और पर्यवेक्षक अपने वरिष्ठ साथियों को विदा करने पहुँचे।
VOB का नजरिया: पटरियों के पीछे के ‘असली नायक’
अक्सर हम ट्रेन की रफ्तार और समय की बात करते हैं, लेकिन उन चेहरों को भूल जाते हैं जो रिटायरमेंट की उम्र तक हर मौसम में पटरियों और इंजनों की देखभाल करते रहे। मालदा मंडल की यह परंपरा सराहनीय है, क्योंकि एक कर्मचारी के लिए उसकी विदाई पर मिलने वाला सम्मान उसकी पूरी जिंदगी की कमाई होती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इन सभी 22 सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के सुखी और स्वस्थ भविष्य की कामना करता है।


