‘मजबूर नहीं मजबूत’ बनेंगे बिहार के श्रमिक! विमुक्त बच्चों के लिए खुलेंगे विशेष केंद्र; 23 जांबाज हुए सम्मानित

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • मिशन: “बंधन से सम्मान तक” विषय पर पटना में भव्य कार्यक्रम का आयोजन।
  • बड़ी घोषणा: विमुक्त बाल श्रमिकों के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र शुरू करेगा विभाग।
  • सम्मान: 23 विमुक्त बाल श्रमिकों और बंधुआ मजदूरों को दिया गया उपहार।
  • ग्लोबल विजन: इंटरनेशनल एक्सपर्ट बेंजामिन पुटर ने बिहार सरकार के प्रयासों को सराहा।

पटना: बिहार सरकार अब बाल श्रम की बेड़ियों से आजाद हुए बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए ‘सुपर-प्लान’ पर काम कर रही है। सोमवार को राजधानी स्थित दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्रम संसाधन विभाग ने यह संकल्प दोहराया कि विमुक्त बच्चों को न केवल शिक्षा दी जाएगी, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सशक्त भी बनाया जाएगा। “बंधन से सम्मान तक” विषय पर हुए इस मंथन में पुनर्वास की कमियों को दूर करने की नई रणनीति तैयार की गई।

श्रमायुक्त का मंत्र: “श्रमिक अब मजबूर नहीं, मजबूत बन रहे हैं”

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रमायुक्त (Labor Commissioner) राजेश भारती ने विभाग की दूरगामी योजनाओं का खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारा लक्ष्य केवल बच्चों को विमुक्त कराना नहीं, बल्कि उन्हें ‘सम्मान’ दिलाना है।

  • विशेष प्रशिक्षण केंद्र: विभाग जल्द ही विमुक्त बच्चों के लिए डेडिकेटेड ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने जा रहा है, जहाँ उन्हें शिक्षा के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट के अवसर मिलेंगे।
  • डेटाबेस और योजनाएं: बाल श्रमिकों का एक विस्तृत डेटा तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हें उनकी पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके परिवार तक पहुँचाया जा सके।
  • जागरूकता: बंधुआ मजदूरों और शिल्पकारों को उचित टूल्स और नई तकनीक की जानकारी देने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाएंगे।

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने थपथपाई बिहार की पीठ

​बिहार सरकार के इन प्रयासों को वैश्विक स्तर पर भी सराहना मिल रही है।

  1. बेंजामिन पुटर (International Child Labor Expert): उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार सरकार और श्रम विभाग जिस तरह विमुक्त बाल श्रमिकों के पुनर्वास पर काम कर रहा है, वह सराहनीय है।
  2. सर्टिफिक्स के राजनाथ: उन्होंने बच्चों की तस्करी (Human Trafficking) रोकने और विमुक्त बच्चों द्वारा गठित समूहों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को ‘चेंज मेकर’ के रूप में तैयार करना होगा।

23 ‘नायकों’ का सम्मान: भावुक हुए चेहरे

​कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वह था जब गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आए 23 बाल श्रमिकों और बंधुआ मजदूरों को सम्मानित किया गया। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें उपहार देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इन बच्चों और वयस्कों ने जब अपनी आपबीती और संघर्ष के अनुभव साझा किए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं।

विभागीय एकजुटता: एक मंच पर आए कई अधिकारी

​इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपर श्रमायुक्त विजय कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त राजेश कुमार, और उप श्रमायुक्त पटना अकबर जावेद के साथ-साथ कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने एक स्वर में बच्चों को स्वरोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन से जोड़ने के सुझाव दिए।

VOB का नजरिया: कागजों से निकलकर जमीन पर उतरे राहत

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ सरकार के इस कदम का स्वागत करता है। बाल श्रम एक सामाजिक अभिशाप है और केवल छापेमारी से यह खत्म नहीं होगा। विमुक्त बच्चों के लिए विशेष स्कूल और ट्रेनिंग सेंटर खोलना एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। असल चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि ये बच्चे दोबारा गरीबी के कारण उसी दलदल में न जाएं। विभाग की मुस्तैदी बिहार के कल (बच्चों) को ‘मजबूत’ बनाने की दिशा में एक बड़ा निवेश है।

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